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Oséias 4

इसएल िपरमसवर

1 इसएलिों, यहवचन ो; इस िदययहकददमै। इस सच्‍ै, िकरअर परमसवर ै। 2 उर, ्‍लण, हतकरण, , अर यभिकरण ा; ियम-कयदहद ाँघककरकरैं ैं अर रहवै। 3 इस रण िकरा, अर व-जनु, अर अकपकिां समउसकिहळैंे; अर समदर मछलिाँ ैंी।

4 ो, द-विकरै, उले, ूँणस जकां द-विकरण आळयां तरिां ै। 5 िन-द्‍कर ा, अर भवियवक्‍कर ा; अर ाँ करुँा। 6 रजी; तन्‍ीं िकमै, इस करकीं अपणजक यक ठहरा। इस करकतन्‍अपणपरमसवर ियम-कयदीं िै, ल-बचां िुँा।

7 िजक बढगये, उसतरिां िकरदगये; उनकभव बदलउनकअनदर करुँा। 8 रजपबलिाँ ैं ै, अर रजलसकरैं ैं। 9 इस करकरजलत ी, उसजक ी; उनकचलण सजा, अर उनकां िउननबदला। 10 ैंसही, पर िें ी, अर गमन करैंे, पर बढ़ैंे; ूँउननयहओडमन लगिै।

इसएल ि

11 गमन अर खमधअर खमधु, ्‍ि रषकरैं ैं। 12 रजणस तळसवकरैं ैं, अर उनकछड़ी उननभविबतै। ूँओछपण करआळआतउन ीं बहकै, अर अपणपरमसवर अधनतओछपण करैं। 13 ां, िअर ांदरखतां आचै, इस करकउनक्‍अर पह़ां िां यजकरद4:13 वे उनकै नीच्‍चै अर पहाड़ां की चोटियां पै यज्ञ करदे पहाड़ां की चोटियां सुर्ग के घणी धोरै प्रतीत होवैं सैं, ओड़ै की हवा घणी साफ होवै सै, ओड़ै अदीरश्य परमेसवर की उपासना करणा प्राकृतिक भावना अर निष्कपट भगति का सुझाव देवै सै।, अर ां जळैं ैं। इस रण िाँ ओछपण अर बहयभििै। 14 ििाँ ओछपण अर बहयभिकरैं, उननसजा; ूँथम एके, अर वदिाँ यजकरैं ै; अर णस समझ खदे, ैंे।

15 इसएल, यदयपि ओछपण करै, यहबणै। िलगआओ; अर चढ; अर यहवन कसम कहककसम 16 ूँइसएल हठबछितरिां हठ करयै, इब यहउननबच्‍तरिां े-़े चरा?

17 एपिाँ ै; इस करकउसनरहण े। 18 िखमधैं गमन करण ैं ैं; उनकरधणस जतघणैं ै। 19 उननअपणां उड़ा ी, अर उनकबलिां रण लजिैंे।

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