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उबजणाय कीताप 18

23 तत्‌अब्‌हम ़ा्‌्‌ो, "़ु ़ाचल़ाधरमखत्‌तम करही? 24 कदहय़ेपचधरमहय ़ु ़ाचलहयखत्‌तम करहअनहयपचधरमरण ां करे? 25 आहयकरव़ाधरमअनधरम अनलत हये। आहय़ु आखधरतकरवकरे?"

26 यहभगवो, "कदमनसद़ेपचधरमजड़्‌ा, मनरण हयआखी।"

27 अळतअब्‌हम ो, ", मळ अनखड़ो े; एतर्‌मत कर्‌़ाकरु। 28 कदहयपचधरमांकम हय ; ़ु ांकम हयवरण हयआख़ेखत्‌तम करही?" ो, "कदमनमनजड़्‌ा, मनखत्‌तम करु।"

29 अळतअब्‌हम ो, "कदां जड़्‌ा।" हयो, "रण ईसम करु।"

30 अब्‌हम अळो, , करे, अळ: "कदां जड़्‌ा।" हयो, "कदमनां जड़्‌ा, ईसम करु।"

31 अब्‌हम ो, "मळ, एतर्‌मत कर्‌़ाकरु: कदमनजड़्‌ा।" हयो, "रण मनखत्‌तम करु।"

32 तत्‌अब्‌हम ो, ", करे, एकअळी: कदमनदह जड़्‌ा।" हयो, "दह रण मनखत्‌तम करु।" 33 जत्‌यहअब्‌हम कर ो, तत्‌जत ्‌ो: अनअब्‌हम आहजत ्‌ो।

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