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उबजणाय कीताप 21

17 भगवहयरडअवमळ्‌ो; अनरग आड़ीो, "तऩु हयु? े; ां ां अवभगवमळदले। 18 उठ उठअन; एक ्‌्‌बणवही।" 19 तत्‌भगवउगो, अनएक पड़्‌ो; हय्‌भऱी।

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