1 "ज़ुंण मुखा खारकै आसा, तिंयां फिरा ऐबै मेरै सुहांगा करदै!
पोर्ही निं तिन्नें ईज-बाब एता जोगी बी आथी तै कि तिंयां
मेरै कुक्करा का रोटी खैऊई अर
मेरी भेडा-बाकरीए हेल़्ही फुआल रही सके।
2 तिंयां निं आप्पू ई किछ़ू कामें आथी तै!
मेरै काम करनअ, थिई दूरे गल्ल!
3 तिंयां थिऐ पठी दाल़जी अर तिन्नां हआ तै भुखै ब्रत लागै दै!
राची हआ तै तिंयां धूल़ै-माट्टै जैंदरी खाणां लै
शुक्कै ज़लैल़ै लोल़ै लागै दै कि तिंयां तेता च़ाबी आपणीं भुख शेऊई सके।
4 तिंयां खाआ रेगीस्तानै पज़णै आल़ै शागे ज़लैल़ै,
तिंयां रहा तै झाऊए बूटे ज़लैल़ै च़ाबदै लागी ज़ेथ किछ़ सुआद निं हंदअ।
5 लोग दरल़ाऊआ तै तिन्नां हाक्का भ्रुका पाई
च़ोरा ज़िहै आपणीं नगरी का दूर।
6 तिन्नां पल़ा त डरैऊंणै नाल़ै-खोहल़ै
अर ढुंखरै-डुआरै रहणअ।
7 तिंयां रहा तै कुंगशी-कार्हलै जैंदरी पशू ज़िहै ठुल़्दै लागी,
कांडे झ़ाकल़ा हेठै हआ त तिन्नों रूल़ कठा।
8 तिन्नां काढा तै लोग बेगरै गाधै ज़िहै
दरल़ाऊई नगरी का दूर।
9 पर ऐबै लागा तिंयां मेरी गिह गांठी सुहांगा करदै!
तिन्नां लै आसा हुंह ऐबै मखौल हुअ द।
10 तिन्नां लागा मुंह नेल़ एछणा लै बी च़िल़्ह!
ऐबै सोठा तिंयां इहअ कि तिंयां आसा मुखा खास्सै राम्बल़ै,
तिंयां पाआ दूर खल़्हुई मेरै मुंहां लै थुक्की।
11 मुंह भाल़ी ज़िहअ तिन्नों दिल बोला, तिंयां करा तिहअ,
किल्हैकि परमेशरै किअ हुंह पठी बरैबाद
तैही हुई तिन्नां एतरी हिम्मत।
12 इना उपद्रभी मणछे टोली एछा मुंह च़िक्कदी,
ईंयां हआ मुंह पठी बरैबाद करना लै भांती-भांतीए बिक्री सोठदै लागै दै।
13 तिंयां रोक्का फेरा फेर मेरी बात कि हुंह ठुर्ही नां सके,
अर मुंह मारना लै लाआ तिंयां पूरअ ज़ोर
तिंयां भाल़ा कि मेरी मज़त करदअ निं तेथ कोहै आथी।
14 तिंयां एछा फेरा-फेर मुल्है ठुर्ही
अर उझै का दैआ तिंयां मुंह प्रैंदा लै छ़ाहल़ा।
15 मुंह हआ भितरी हैल़अ पल़अ द,
लोग ज़िहअ मेरअ अदर करा तै, सह बी फर्ल़ाऊअ उझै
मेरी ज़ितणें आशा बी लुक्की बादल़ा ज़ेही।
16 ऐबै च़ाल्लअ मेरै मर्हुई,
मुंह निस्सअ दाह दी केही राम हई।
17 राची लागा मुंह हाडके ज़ोल़ै-ज़ोल़ै दाह
तिंयां झोशा करै उझ़िआ होर बी खास्सी दाह।
18 परमेशरै ढाकअ हुंह गल़ा का
अर तेऊ पाई मेरी घेरी क्रिंज़ा।
19 तेऊ शोट्टअ हुंह धरनीं च़िक्करै जैंदरी,
हुंह हुअ ऐबै माट्टै अर छ़ारा ज़िहअ।
20 हे परमेशर, हुंह पाआ ताह सेटा लेर पकार,
पर तंऐं निं कधू तेतो ज़बाब ई दैनअ!
मंऐं मांगी ताखा मज़त पर तंऐं निं
मुंह बाखा धैन ई दैनअ!
21 तूह हुअ मुल्है बेघै काठअ,
तंऐं शोट्टअ हुंह आपणैं ज़ोरा करै हंती।
22 तूह फर्ल़ाऊआ मुंह बागरी करै दूर,
तंऐं छ़णाटअ हुंह ढिशा करै ओर्ही-पोर्ही।
23 ऐबै गअ मुखा थोघ लागी कि तंऐं लाअ द हुंह मारी पाई,
तूह च़ाह मुंह तिधी पजैल़णअ ज़िधी
मरी करै ज़ीबो शाह डेओआ।
24 मंऐं निं कोही गरीबा लै आपणैं हाथै किछ़ै बूरअ किअ
अर नां हुंह खरीए पलका तिन्नें मज़त करनै का पिछ़ू हटअ।
25 दुख-तकलिफी दी पल़ै दै मणछा भाल़ी छ़ुटा ती मुखा कबल्ली लेरा,
ज़हा का किछ़ निं हंदअ थिअ, तिन्नां भाल़ी हआ त हुंह बेघै दुखी।
26 मंऐं ज़ाणअ त इहअ कि आजू हणीं मेरै मौज़,
पर मुल्है पल़ी आफ़ता प्रैंदै आफ़त,
मेरी ती एही आशा कि राच जाणीं भैई,
पर मुल्है हुअ होर बी नटिप्प न्हैरअ।
27 पेटा भितरी निस्सी मेरै दाहे झोश केही बेशी,
मेरै दुखे धैल़ै निस्सै मुक्की ई आथी।
28 मंऐं ज़िऊई दुखी ज़िन्दगी, सुरज़े धुप्पै करै बी निं मुंह खुशी हंदी ती,
लोगा लै बी लागअ हुंह सभा दी बोल्दअ कि ज़ीबाण मेरी मज़त करा।
29 हुंह रहअ दुखी अर कल्ही शैल़ी अर
हुहल़ू ज़िहअ ल़ुहल़ी लांदअ लागी।
30 मेरी हुई सारी घेर ई काल़ी अर
ज़ोरै जाम्हां करै भुझ़ुअ हुंह पठी।
31 कोई धैल़ै किहअ थिअ हुंह खुशीए बींन अर बशूरी शुणनै आल़अ
पर ऐबै शुण्हिंआं मुखा फेरा-फेर सिधअ लेरनअ अर मखाण पल़अ द।"