1 आयूब लागअ इहअ बोल्दअ,
2 ज़ै मेरअ दुख तोली सकदै अर
ज़ै मेरी सारी खरी तराकल़ी दी पल़दी,
3 तेतो बज़न निखल़णअ त सारै समुंदरे रेता का बी खास्सअ,
तै निं तम्हैं मेरी तांऊंल़ी गल्ला लै रहैन हणैं तै।
4 महान परमेशर ज़हा का सारअ बल आसा,
तेऊ खभेऊऐ मुल्है आपणैं तिछै कतीर।
तेतो बिश लागअ मेरी सारी घेरी दी।
परमेशरे आसा हुंह फेर-फिरदअ डरैऊई डाहअ द।
5 हुंह कै खरी खोज़ी निं सकदअ?
बणें गाधै कै घाहा बाझ़ी चाछल़दै निं आथी?
बल्द कै भुखै पेटै गल़ंगा निं लांदअ?
6 लूंणां बाझ़ी नसादअ स्लूणअ निं कोहै खांदअ अर
नां आंडे शल़ेफल़ै दी सुआद हंदअ।
7 तेही ई हुई इहै भाल़ी मेरी भुख खतम,
ज़िहअ बी हुंह खाआ, तेता करै लागअ हुंह बमार हंदअ।
8,9 परमेशर ज़िहअ हुंह मांगा, तिहअ किल्है निस्सअ दैई?
सह मेरी अरज़ किल्है निस्सअ शूणीं?
एता का लोल़ी त हुंह तेऊ आपणैं हाथै मारी पाअ!
10 ज़ै मुखा इहअ थोघ लागदअ,
तै दैणीं ती मुंह एतरी दाह दी बी खुशी दी छ़ाहल़ा।
हुंह ज़ाणा कि परमेशर आसा पबित्र,
हुंह निं कधि तेऊए हुकम मनणै का पिछ़ू हटअ।
11 मुंह निं ज़िऊंदै रहणा लै ज़ोर-ज़ाहण ई रहै!
मेरी हुई आशा ई खतम, मंऐं किज़ै लाअ ज़िऊंदै रही करी?
12 हुंह निं पात्थरो आथी बणाअं द अर
नां मेरी देही कांस्से आथी कि सह आसा पाक्की।
13 मुंह निं कोहिओ आसरअ आथी कि मेरी कुंण मज़त करे,
ऐबै निं हुंह बिज़री सकदअ।
14 "मेरै साथीओ, मेरै च़ाल्लअ मर्हुई,
ऐहा खरी लोल़ी ती तम्हैं मेरी मज़त किई,
तेतो निं तम्हां किछ़ै मतलब आथी कि
हुंह महान परमेशरो ज़हा का सारअ बल आसा, तेऊओ अदर करा कि नांईं।
15,16 तम्हैं मेरै साथी दैनअ भराल़कै नाल़ा ज़िहअ धोखअ,
ज़ुंण बरसात मुक्कदी निं तेथ पाणीं ई हंदअ।
हिंऊंदै, रहा तेथ शाण लागी पर
17 बसंते रीत एछदी-एछदी जाआ तिंयां
धुप्पे गरमीं करै गल़ी करै पठी शुक्की!
18 हुंह हुअ ऊँटे शुंआरी करनै आल़ै ज़िहअ,
ज़ुंण रेगीस्तानै पाणीं लोल़अ रहा ठुल़्दअ लागी,
खिरी हआ पाणीं बाझ़ी तेऊए मौत।
19 कई ऊँटा दी शुंआर तै तेमा नाओंए नगरी का आऐ दै,
शेबा ज़ैगा का आऐ दै शुंआरो छ़ुंढ बी लागै तिन्नां ई ज़िहै पाणीं लोल़ै,
20 तिंयां थिऐ एही आशा निहंचै रहै दै कि तिन्नां जाणअ पाणीं भेटी,
ज़ांऊं तिंयां नाल़ै पुजै, सह भेटअ शुक्कअ अर तिन्नें आशा बी हुई खतम।
21 तिहै हुऐ मुल्है तम्हैं,
ज़ांऊं तम्हैं मेरी खरी भाल़ी,
तम्हैं लागै डरै मुखा दूर ठुर्हदै!
22 तम्हैं किल्है डरै इहै? मंऐं कै तम्हां का कधू किज़ै च़ीज़ मांगी?
कि मंऐं इहअ बोलअ कि आपणीं ज़ैदाता का दैआ मुल्है किज़ै?
23 कि मंऐं तम्हां लै इहअ बोलअ कि
तम्हैं बच़ाऊआ मुंह मेरै दुशमणा का?
24 तम्हैं खोज़ा मुखा मेरअ किज़ै कशूर आसा?
तम्हैं समझ़ाऊआ मुंह, हुंह
रहूं च़ुप्पी थारी गल्ला शूणअ लागी।
25 शुची गल्ला ज़ाण्हिंआं कल़ुई,
पर थारी हठ करनी आसा बृथा।
26 मेरै च़ाल्लअ इधी मर्हुई,
अर तम्हैं बोला मेरी गल्ला बागरी ज़ेही बृथा!
27 आप्पू ता आसा तम्हैं छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैं
गलामी लै बेच़ी करै ढब्बै खटी सेठ हुऐ दै!
28 मेरै मुंहैं दैआ नदर!
तम्हां का कै हुंह झ़ुठअ शुझिआ?
29 ऐबै बोलअ तम्हैं बतेर्हअ, मेरी आसा तम्हां का अरज़, झ़ुठअ बोल़णें पाआ छ़ाड़।
मुंह दी खोट काढदै निं लागा, हुंह आसा शुचअ मणछ।
30 मुखा कै भलै बूरैओ थोघ निं आथी?
मेरी गल्ला दी कै छ़ल़-कपट आसा?"