1 साम ख वी दो दूत सदोम को जोने आया; अऊर लूत सदोम को फाटक को जोने बठो हतो। उन ख देख ख वाहा ओ न भेंट करन को लाने उठो, अऊर मुँह को बल झूख ख दण्डवत् कर कहयो, 2 अऊर कहयो, "मोरो मालिक हुन, मी तुम से विनती करु हूँ। तुम अपना सेवक को घर पधारिये अऊर अपनो पाय धोइए। तुम यहाँ रात भर अराम करिये। तुम भुनसारो उठ ख अपनो रस्ता पर चलो जानो।" कि उन न जवाब दियो, नी, हम चऊक म रात बिताएँगो। 3 पर ओ न ओसे विनती कर ख उन ख मनायो; ऐकोलाने वी ओको साथ चल ख ओको घर म आए; अऊर ओ न उन को लाने खाना तैयार कियो, अऊर बिना खमीर की रोटी हुन बना ख उन ख खिलाई। 4 उन को सो जान को पहले, सदोम नगर ख अदमी न, जवान से ले ख बूढ़ो लक, वरन् चारो ओर से पुरा लोगो न ओ ख उस घर ख घेर लियो; 5 अऊर लूत ख पुकार ख कहन लगी, "जे अदमी आज रात ख तोरो जोने आए है वी किते है? उन ख हमारो पास बाहार ले आ कि हम उन से भोग करहे।" 6 तब लूत उनको जोने दुवार को बाहर गयो, अऊर किवाड़ ख अपनो पीछे बन्द कर ख कहयो, 7 "अरे मोरा भई हुन, असी बुरई नी करनू। 8 सुनो, मोरी दो पोरी हुन है जिन न अब लक अदमी को मुँह नी देखो; इच्छा हो ते मी उन ख तुम्हारो जोने बाहार ले आऊ, अऊर तुम ख जसो अच्छो लगे वसो व्यवहार उन से करो; पर इन अदमी हुन से कुछ न करो; काहेकि या मोरी छत तले आए है।" 9 उन न कहयो, "हट जा!" फिर वी कहन लगया, "तू एक परदेसी हो ख यहाँ रहवन को लाने आयो, पर अब न्यायी भी बन बैठो है; ऐकोलाने अब हम ओसे भी जादा तोरो साथ बुरई करेगे।" अऊर वी उस अदमी लूत ख बैजा दबावन लगया, अऊर किवाड़ तोड़न को लाने जोने आया। 10 तब उन मिजवान हुन न हात बढ़ा ख लूत ख अपनो पास घर म खीच लियो, अऊर किवाड़ ख बन्द कर दियो। 11 अऊर उन न का छोटा, का बड़ा, सब अदमी ख जे घर को दुवार पर हतो, अन्धा कर दियो, अत: वी दुवार ख टटोलह-टटोलह थक गया।
12 फिर उन मिजवान हुन न लूत से पुछयो, "यहाँ तोरो अऊर कोन-कोन है? दामाद, पोरिया, पोरी हुन, अऊर नगर म तोरो जे कोई हो, उन सब ख ले ख इस जगह से निकल जा। 13 काहेकि हम या जगह खत्म करन पर है, ऐकोलाने कि ओकी बुरई यहोवा को सम्मुख बढ़ गई है; अऊर यहोवा न हमे ऐको सत्यानास करन को लाने भेजो है।" 14 तब लूत न निकल ख अपनो दामादों ख, जिनको संग ओकी पोरी की सगाई होय गई थी, समझा ख कहयो, "उठो, इस जगह से निकल ख चलो; काहेकि यहोवा यू नगर ख खत्म करन पर है।" पर वहा अपनो दामादों कि दृस्टि म ठट्ठा करन वालो जान पडो। 15 जब भुनसारो होवन लगी, तब दूत हुन न लूत से जल्दी करन को कहयो अऊर बोल्यो, "उठ, अपनी पत्नी अऊर दोई पोरी हुन ख जे यहाँ है ले जा; नी ते तू भी यू नगर को अधर्म म भस्म हो जाएगो।" 16 पर वहा विलम्ब करते रहयो; इस पर उन अदमी हुन न ओको अऊर ओकी पत्नी, अऊर दोई पोरी हुन को हात पकडो, काहेकि यहोवा की दया ओ पर हती; अऊर उन ख निकाल ख नगर को बाहार कर दियो। 17 अऊर असो हुओ कि जब उन न उन ख बाहार निकायो, तब कहयो, "अपनो जान ले ख भाग जा; पीछे कि ओर नी ताकनो, अऊर तराई भर म नी ठहरनो; ऊ पहाड़ पर भाग जानो, नी ते तू भी भस्म हो जाऐगो।" 18 लूत न ओसे कहयो, "अरे प्रभु, असो न कर 19 तुमारो सेवक पर तुमारी दया-दृस्टि हुई है। तुम न मोरी जान बचा ख मो पर अपार करुना करी है। पर मी पहाड़ की ओर नी भाग सकू। असो न हो की वाहा मोरो साथ कोई दुरघटना होय जाए अऊर मी मर जाऊ। 20 देख, वहा नगर असो निकट है कि मी वहा भाग सकता हूँ, अऊर वहा छोटा भी है मो ख वही भाग जान दा, का वहा नगर छोटो नी है? अऊर मोरी जान बच जाएगी।" 21 दुत न लोट से कहयो, "देख, मी न यू नगर को बारे म तुम्हारी विनती स्वीकार करी। जे नगर को बारे म तुम न कहयो है, ओ ख मी खत्म नी करूँगो।" 22 अविलम्ब वहा भाग जाओ। जब लक तुम वाहा नी पहुँच जाओगो, मी कुछ नी कर सकू। ऐकोलाने ऊ नगर को नाम सोअर पड़ो।
23 लूत ख सोअर को जोने पहुँचते ही सूरज धरती प सूरज निकल आयो। 24 प्रभु न बध्दल से सदोम अऊर अमोरा नगर प गंधक तथा आगी की वरसा करी। 25 अऊर उन नगर ख अऊर ऊ पुरो तराई ख, अऊर नगर ख पुरा निवासी हुन ख, धरती ख पुरी उपज सहीत खत्म कर दियो। 26 लूत की पत्नी न जे ओको पीछे हती दृस्टि फेर ख पीछे की ओर देखयो, अऊर वहा नमक खम्मा बन गई। 27 अब्राहम बडो सबेरे उठ ख ऊ जगह पर गयो, जाहा ऊ पहले प्रभु को सम्मुख खड़ो हुए थो। 28 अऊर सदोम अऊर अमोरा, अऊर उ तराई को पुरो देस की ओर आँख उठा ख का देखो कि ऊ देस म से धधकती हुई भट्टी को सो धूआँ उठ रहयो है। 29 असो हुओ कि जब परमेस्वर न खत्म करियो, तब उसे अब्राहम ख याद हुओ। जब ओ न ऊ नगर ख उलट-पुलट दियो, जाहा लूत रहवत रह, तब विनास को मध्य से लूत ख निकाल ख अन्यत्र भेज दियो।
30 लूत सोअर नगर ख छोड़ ख अपनी दो पोरी हुन को साथ पहाड़ पर रहन लगिया। वहा सोअर नगर म रहवन को लाने डरत रह। अत: वाहा अपनी दो पोरी हुन को साथ पहाडी एक गुफा म रहन लगिया। 31 बडी पोरी न छोटी से कहयो, "हमारो बाप बूढ़ो है, अऊर याहा एक भी असो अदमी नी जे दुनिया की रीति-रीवाज को अनुसार हमारो जोने आए अऊर हम सन्तान पैदा करे। 32 ऐकोलाने आ, हम अपनो बाप ख दाखमधु पिला ख ओको संग सोयो, जसो की हम अपनो बाप ख वंस ख बचाए रखे।" 33 अत: उन न ऊ ही दिन रात को बखत अपनो बाप ख दाखमधु पिलायो, तब बडी बेटी जा ख अपनो बाप को पास लेट गई; पर ओ नी जानो कि वहा कब लेटी अऊर कब उठ गई। 34 अऊर असो हुओ कि दुसरो दिन बड़ी न छोटी से कहयो, "देख, कल रात ख मी अपनो बाप को साथ सोई; ऐकोलाने आज भी रात ख हम ओ ख दाखमधु पिलाएँ; तब तू जा ख ओको साथ सोवन कि हम अपनो बाप को दुवारा वंस पैदा करे।" 35 अत: उन न ऊ दिन भी रात को बखत अपनो बाप ख दाखमधु पिलायो; अऊर छोटी पोरी जा ख ओको जोने लेट गई, पर ओ ख ओको भी सोवन अऊर उठन को टेमं को ग्यान न थो। 36 इस प्रकार लूत की दोई पोरी हुन अपनो बाप से पेट से भई। 37 बडी पोरी को एक पोरिया पैदा हुओ। ओ न ओको नाम मोआब रखो। वहा आज लक मोआबी जाति को रास्ट-बाप मानो जवा है। 38 छोटी पोरी ख भी एक पोरिया पैदा हुओ। ओ न ओको नाम बेनअम्मी रखो। वाहा आज लक अम्मोनी जाति को रास्ट-बाप मानो जावह है।