1,2 मोसा बोलअ इज़राईली लै इहअ, "केभै सका आजू इहअ बी हई कि तम्हां सेटा कुंण गूर या इहअ मणछ एछे ज़ुंण तम्हां का नछ़ैण अर च़मत्कार रहैऊए या आजू हणैं आल़ी गल्ला प्रगट करी इहअ बोले, ‘च़ाल्ला हाम्हां डेऊणअ तिन्नां देअआ पूज़दै, ज़ेतो तम्हां का आझ़ तैणीं थोघ ई निं आथी।’ 3 ज़ै कुंण गूर इहअ बोले, तेऊए गल्ला निं मनी आथी! थारअ परमेशर बिधाता परखा तम्हां इना करै अर सह हआ ऐहा गल्ला भाल़अ लागअ द कि तम्हैं तेऊ लै आपणअ सारअ मन्न, प्राण अर आपणअ सारअ ज़ोर लाई झ़ूरा कि नांईं। 4 तम्हैं रहै आपणैं परमेशर बिधाता लै पठी शुचै-पाक्कै। तम्हैं मनै सिधै बिधाते हुकम अर तम्हैं करनी सिधी तेऊए ई च़ाकरी अर एता पूरै करना लै लोल़ी तम्हां सदा हैल़अ-फिकर हुअ। 5 किल्हैकि सह थिअ बिधाता ज़ुंणी तम्हैं मिसर देशे गलामी का आणै छ़ड़ैऊई।
"ज़ै कुंण गूर तम्हां लै इहअ खोज़ी तम्हां कबाता पाए कि तम्हां निं बिधाते हुकम मनणे अर स्तोती करने ज़रुरत आथी! सह इहअ गूर थिऐ कदुष्ट, तेऊ पाऐ तम्हैं मारी, तै हणीं तम्हां मांझ़ा का सह बूराई गोधी का खतम।
6-10 "थारअ आपणअ बी सका केभै इहअ बोली, ‘च़ाल्ला, हाम्हां डेऊणअ होरी देअआ-देबीए पूज़ा करदै, तेता करै निं हाम्हां किछ़ै फरक च़ाल्लअ पल़ी।’ इहअ बोल़णैं आल़अ मणछ सका थारअ खास साथी-संघी हई या थारै सक्कै भाई-बैहणी, थारै आपणैं शोहरू-शोहरी, या थारी पैरी बेटल़ी या मर्धा मांझ़ै कोहै बी हई। पर तम्हैं निं तिन्नां मणछे गल्ला शूणीं ज़ुंण तम्हां लै एही उंबल़ी शिक्षा दैए! तम्हैं पाऐ तिन्नां पात्थरो ढो दैई मारी। इहै मणछा लै पैहली पात्थरै बाहणीं तेऊ ई मणछा ज़सरअ सह सक्कअ आसा, बाकी पात्थरो ढो दैणैंओ काम करै सारी टोलीए लोग। इहै मणछा लै निं झींण करदै लागी।
"होर ज़ाती ज़िना देअ-देबी पूज़ा, तिन्नैं निं तम्हां अर थारै दादा-बाबा लै इहअ किछ़ै आथी किअ द कि तम्हां तिन्नां सेटा पल़े डेऊणअ। ज़ुंण लोग तम्हां लै तिन्नां होरी देअआ-देबीए पूज़ा करना लै बोला, तिंयां च़ाहा इहअ कि तम्हैं लोल़ी थारै तेऊ परमेशर बिधाता का दूर हुऐ ज़ुंणी तम्हैं मिसर देशे गलामी का आणै छ़ड़ैऊई। ज़ुंण तम्हां थारै परमेशर बिधाता छ़ाडी होरी देअ-देबी पूज़णा लै बोला तिन्नां इहै मणछा निं तम्हैं मारनै बाझ़ी छ़ाडी, 11 ताकि होरी इज़राईली बी इना गल्ला शूणीं डअर रहे अर तेखअ निं तम्हां मांझ़ै कहा होरी बी इहअ कदुष्ट काम कधि करनअ।
12 "ज़ांऊं तेऊ देशै तम्हां बस्सणा लै बिधाता नगरी दैई हेरे, तम्हैं सका तिन्नां मांझ़ै कहा एकी नगरीए बारै एही फुआह शूणीं कि 13 तिन्नां मांझ़ै कई कदुष्ट मणछै पाऐ सोभै लोग सारी नगरी दी एही गल्ला फणाऊंई करै कबाता, ‘एछा हाम्हां डेऊणअ तिन्नां देअआ पूज़दै, ज़ेता लै हाम्हैं आझ़ तैणीं पाखलै थिऐ।’ 14 एते करै राम्बल़ै करै पुछ़-ज़ाच़ कि एही फुआह सच्च़ी आसा पल़ी दी। ज़ै तम्हां का इहअ थोघ लागे कि थारै देशै तैहा नगरीए लोगै किअ सच्च़ी इहअ च़िल़्हखरअ काम, 15 तै पाऐ तैहा नगरीए लोगा तिन्नें डागै-चैणैं संघी तलबारा करै मारी।
16,17 "ज़ेतरै लोग तैहा नगरी दी रहा तै, तिन्नें सोभी समाना संघी सारी ज़ैदात आणै नगरी मांझ़ा-मांझ़ी च़फै लै संघा लाऐ तेतो तिधी रूल़, तेता का निं आप्पू लै किछ़ै निंईं। तेखअ चैल़ै तेऊ रूल़ा अर सारी नगरी दी आग अर तेखअ निं तैहा नगरी भिई बणाऊंदै बी लागी। सह सारी नगरी हणीं तम्हैं परमेशर बिधाता लै हूम किई दी। तेखअ निं बिधातो कोप तम्हां लै पल़णअ। बिधाता करनी तम्हां लै झींण अर तम्हैं रहणैं खास्सै हंदै लागी ज़ेही तेऊ थारै दादा-बाबा लै ज़बान आसा दैनी दी। 18 इहअ हणअ तै ई ज़ै तम्हैं बिधाते सोभी हुकमा मने ज़ुंण मंऐं आझ़ तम्हां का लाऐ खोज़ी। तम्हैं करै तिहअ ई ज़िहअ बिधाता च़ाहा कि तम्हैं करे।"