जपताह पांच़े शोहरी
34 ज़ांऊं जपताह मिज़पा नगरी आपणैं घअरा लै बापस फिरअ, तेऊए शोहरी आई डफली बाज़दी अर नाच़दी खेल्हदी तेऊ सेटा मिलदी। जपताहे ती सह एक्कै शोहरी अर तैहा का सुआई निं तेऊए होर शोहरू-शोहरी आथी तै।11:34 लुआ. 15:20; 1 शमू. 18:6 35 ज़ांऊं जपताह का आपणीं शोहरी एछदी शुझुई, तेऊ धेल़ै-च़िरै दुखै आपणैं झिकल़ै संघा बोलअ इहअ, "मेरी बेटीऐ! तंऐं शोटअ मेरअ चल़ैट चोल़ी! तंऐं किल्है लाई मुल्है ऐबै अह नज़िरन दाह? मंऐं आसा बिधाता लै मानत मनी दी अर तेता पूरी करनै का निं हुंह पिछ़ू हटी सकदअ।"