बेबीलोन को गढ़
1 पहले पूरी पृथ्वी के लोगन की एकै भासा रहै और बे एकै सब्द को इस्तमाल करत रहैं। 2 बौ समय लोग अगार दिसा के घाँईं से घूमत-घामत, बे बेबीलोन के सिनार देस के एक मैदान मैं आएकै हूँनै बस गै। 3 बे एक दुसरे से कहीं, "चलौ! अब ईंट बनामैं और इनकै आगी मैं अच्छे से पकामैं।" और फिर इमारत बनान ताहीं जे पत्थर की जघा मैं ईंट और चूना की जघा मैं कोलतार को इस्तमाल करन लगे। 4 बे फिर कहीं, "आबौ हम एक ऐसो सहर बनाँगे, जोके गुम्मट की चुटिया स्वर्ग ले पहोंचत होए, ताकि हम अपनो नाओं कर सकैं और हम पूरी पृथ्वी मैं तितर-बितर न होमैं।"
5 लेकिन प्रभु बौ सहर और गुम्मट कै देखन ताहीं नीचे आओ, जो बे लोग बनात रहैं। 6 और प्रभु कही, "देखौ, जे एकै जाति के लोग है। जे सबन की भासा भी एकै है। जौ तौ उनके आन बारे समय के कामन की सुरुवात है। जो काम बे अग्गु करनो चाहंगे, बौ उनके ताहीं नामुमकिन ना होगो! 7 तौ आबौ आपन नीचे जाएकै उनकी भासा मैं ऐसी गड़बड़ी करैं कि बे एक दुसरेन कै नाय समझ पामैं।" 8 ऐसिये करकै प्रभु उनकै पूरी पृथ्वी मैं तितर-बितर कर दई, और बे सहर बनानो छोड़ दईं। 9 बौ सहर को नाओं बेबीलोन रखो गौ, काहैकि हूँना परमेस्वर सब लोगन की भासा मैं गड़बड़ी कर दई, और हूँनै से बौ उनकै पूरी पृथ्वी मैं तितर-बितर कर दई।