इंसान के पाप की सुरुवात
1 सब बन जानवरन मैं साँप भौत चालाँक जानवर रहै जोकै परमेस्वर बनाई रहै। साँप बईय्यर से पूँछी, "का परमेस्वर सच्ची मैं कही रहै, कि तुम बगिया के कोई भी पेंड़ के फल मत खईयो?"
2 बईय्यर साँप कै जबाब देथै, "हम बगिया के कोई भी पेंड़ के फल खाए सकथैं, 3 पर परमेस्वर हमसे कही है, ‘कि तुम जौ बगिया के बीच बारे पेंड़ को फल मत खईयो, बाकै छुईयो भी मति, अगर तुम ऐसो करैगे तौ तुम मर जागे।’"
4 तौ साँप बईय्यर कै जबाब देथै, "जौ सच नाय है; तुमरी मौत नाय होगी। 5 काहैकि परमेस्वर जानथै कि अगर तुम जाकै खागे तौ तुमरी आँखी खुल जागी, और तुम भले-बुरे को ग्यान पाएकै परमेस्वर के तराहनी बन जागे।"