यूसुफ को फिरौन राजा के सपनो को मतलब बतानो
1 दुई साल बीतन के बाद मिस्र को राजा एक सपने मैं देखी, कि बौ नील नदिया के किनारे खड़ो है। 2 जब सात मोटी-ताजी गईंय्या नील नदिया से निकरकै घाँस चुगन लगथैं। 3 उनके पच्छू सात दुबली और देखन मैं हड्डीदार गईंय्या नील नदिया से बाहर निकरीं। बे नदिया के घाट मैं दुसरी गईंय्यन के किनारे ठाड़ गईं। 4 और कमजोर गईंय्या मोटी-ताजी गईंय्यन कै खाए लईं। तभई राजा की नींद खुल गई। 5 बौ फिर सोए गौ और एक और सपनो देखी। एक डंठर मैं अनाज की सात भरी भई और पकी भई बाली निकरीं। 6 फिर सात और पतरी अनाज की बाली निकरीं, जो पुर्वईया ब्यार से भुरसी भई रहैं, 7 और अनाज की पतरी बाली, मोटी और भरी बाली अनाज की बालिन कै निगल गईं। फिर राजा जग जाथै और बाकै एहसास भौ कि बौ सपनो देखरौ है। 8 सुबेरे कै बौ चिंता मैं पड़ जाथै, और तभई राजा मिस्र के सब जादूगर और पंडितन कै बुलबाई। फिर बौ उन्हैं अपने सपनो के बारे मैं बताई, लेकिन कोई भी बाकै नाय बताए सको।
16 यूसुफ जबाब दई, "मैं ना जानथौं, महाराज! लेकिन परमेस्वर के झोने तेरे मुताबिक बाको जबाब है।"
25 तौ यूसुफ राजा से कही, "दोनों सपनो को मतलब एकै है; परमेस्वर तोए बताए दई है कि बौ का करनो चाहथै।
32 फिरौन को सपनो दुई बार आन की बजह जौ है कि परमेस्वर अपनो इरादा पक्को कर लई है, और जाकै जल्दिये करैगो।