इंसान को पाप
1 जब इंसानी जाति पूरी दुनिया मैं फैल गई रहै, और उनकी लौड़िया भी जनम लेत रहैं, 2 तौ कुछ परमेस्वर के लौड़ा, इंसान की लौड़ियन कै देखीं कि बे सुगड़ है। 3 फिर प्रभु कही, "मेरी आत्मा इंसान के भीतर हमेसा के ताहीं बास ना करंगो; काहैकि इंसान एक मात्र सरीर है। अब से बे एक सौ बीस साल से जाधे जिंदगी ना जींगे।" 4 बे दिनन मैं पृथ्वी मैं दानव रहैं, बे तहुँओं रहैं, जब परमेस्वर के लौड़ा इंसान की लौड़ियन के झोने गै तौ उनके जरिये जो बालका पैदा भै, बे पुराने जमाने के सक्तिसाली और सुप्रसिद्ध वीर रहैं।
5 जब प्रभु देखी, कि पृथ्वी मैं सब रहन बारे लोग कित्ते दुस्ट हैं, और उनके मन बिचार हर समय बुराई के घाँईंये रहथै, 6 और प्रभु पृथ्वी मैं इंसान कै बनाएकै बड़ा पछतानो। बौ अपने मन मैं भौत दुखी भौ। 7 प्रभु कही, "मैं इंसान कै पालतू जानवरन कै नेंगन बारे, और आसमान के पक्छियन कै मिटाए दुंगो, काहैकि मोकै जौ बात को दुख कि मैं उनकै बनाओ हौं।" 8 लेकिन प्रभु को कृपा नूह के ऊपर रहै।
नूह के बारे मैं
9 जौ कहानी नूह के परिवार की है, नूह एक धर्मी आदमी रहै और बौ अपने समय मैं इकल्लो निर्दोस रहै। और बौ हर समय परमेस्वर के संग - सोवत मैं रहत रहै।