13 परमेस्वर नूह से कही मैं सब प्राड़िन कै नास कर दुंगो और पृथ्वी इंसान से भ्रस्ट हुई चुकी है। निस्चय मैं पृथ्वी और बे लोगन सुंदा नास कर दुँगो। 14 तैं गोपेर पेंड़ की अच्छी कठिया से अपने ताहीं एक बड़ी नईंय्याँ बना; जामैं कमरा बना और जाके अंदर-बाहर कोलतार को लेप लगइये। 15 ऐसे करकै तुम जाकै बनाबौ, जहाज एक सौ तैंतीस मीटर लम्बो, बाईस मीटर चौंड़ो और तेरह मीटर ऊँचो बनइये। 16 जहाज मैं एक खिड़की बनइये और आधे मीटर ऊपर छत बनईयो, और जहाज मैं एक और फाटक बनईयो, और जहाज मैं तीन मंजिल बनईये, ऊपर, बीच और नीचे को मंजिल।
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