पेड़ पै लटकाए जाण आळा श्रापित
22 "फेर जै किसे नै मौत की सजा कै जोग्गा कोए पाप होया हो जिसतै वो मार दिया जावै, अर तू उसकी लाश नै दरखत पै लटका दे, 23 तो वो लाश रात नै दरखत पै टंगी ना रहवै, जरुर उस्से दिन उस ताहीं माट्टी दिये, क्यूँके जो लटकाया गया हो वो परमेसवर की ओड़ तै श्रापित ठहरया सै; इस करकै जो देश तेरा परमेसवर यहोवा तेरा हिस्सा करकै देवै सै उस धरती नै अशुद्ध ना करिये।"