नियम-कायदे पत्थरां पै लिखण का हुकम
1 फेर इस्राएल के बुजुर्ग माणसां समेत मूसा नै प्रजा के माणसां ताहीं ये हुकम दिये, "जितने हुकम मै आज थमनै सुणाऊँ सूं उन सारया नै मानियो। 2 अर जिब थम यरदन नदी के पार होकै उस देश म्ह पोहचों, जो तेरा परमेसवर यहोवा तन्नै देवै सै, फेर बड़े-बड़े पत्थर खड़े कर लियो, अर उनपै चुन्ना पोतियो; 3 अर पार होण कै बाद उनपै इन नियम-कायदे के सारे वचनां नै लिखियो, ज्यांतै के जो देश तेरै बड्डे बुजुर्गां का परमेसवर यहोवा अपणे वचन कै मुताबिक तन्नै देवै सै, अर जिस म्ह दूध अर शहद की धारा27:3 उपजाऊ धरती बहवै सैं, उस देश म्ह तू जाण पावै। 4 फेर जिन पत्थरां कै बारै म्ह मन्नै आज हुकम दिया सै, उननै थम यरदन नदी कै परली ओड़ होकै एबाल पहाड़ पै खड्या करियो, अर उनपै चुन्ना पोतियो। 5 अर उड़ैए अपणे परमेसवर यहोवा कै खात्तर पत्थरां की एक वेदी बणाईयो, उनपै कोए औजार ना चलाईयो। 6 अपणे परमेसवर यहोवा की वेदी बिनगढ़े पत्थरां की बणाकै उसपै उसकै खात्तर होमबलि चढ़ाईयों; 7 अर उड़ैए मेलबलि भी चढ़ाकै खाणा खाईयों, अर अपणे परमेसवर यहोवा कै स्याम्ही आनन्द करियो। 8 अर उन पत्थरां पै इस नियम-कायदे कै सारे वचनां नै साफ-साफ लिख दियो।"
9 फेर मूसा अर लेवी याजकां नै सारे इस्राएलियाँ तै या भी कह्या, "हे इस्राएल, चुपचाप रहकै सुण; आज कै दिन तू अपणे परमेसवर यहोवा की प्रजा होग्या सै। 10 इस करकै अपणे परमेसवर यहोवा की बात मानिये, अर उसके जो-जो हुकम अर विधि मै आज तन्नै सुणाऊँ सूं उनका पालन करिये।"
अभिशाप वचन
11 फेर उस्से दिन मूसा नै प्रजा कै माणसां ताहीं या हुकम दिया, 12 "जिब थम यरदन नदी के परली ओड़ पार हो जाओ फेर शिमोन, लेवी, यहूदा, इस्साकार, यूसुफ, अर बिन्यामीन, ये गिरिज्जीम पहाड़ पै खड़े होकै आशीर्वाद सुणावै। 13 अर रूबेन, गाद, आशेर, जबूलून, दान, अर नप्ताली, ये एबाल पहाड़ पै खड़े होकै श्राप सुणावै।" 14 फेर लेवी माणस सारे इस्राएली माणसां तै पुकार कै कहवैं:
15 "श्रापित हो वो माणस जो कोए मूर्ति कारीगर तै खुदवाकै या ढळवाकै निराळी जगहां म्ह स्थापना करै, क्यूँके इसतै यहोवा नफरत करै सै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
16 "श्रापित हो वो जो अपणे माँ-बाप नै तुच्छ जाणै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
17 "श्रापित हो वो जो किसे दुसरे की हद नै हटावै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
18 "श्रापित हो वो जो आन्धे नै राह तै भटका दे। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
19 "श्रापित हो वो जो परदेशी, अनाथ, या बिधवा का न्याय बिगाड़ै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
20 "श्रापित हो वो जो अपणी सौतेल्ली माँ तै कुकर्म करै, क्यूँके वो अपणे पिता का ओढ़णा उघाड़ै सै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
21 "श्रापित हो वो जो किसे ढाळ के पशु तै कुकर्म करै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
22 "श्रापित हो वो जो अपणी भाण, चाहे सगी हो चाहे सौतेल्ली, तै कुकर्म करै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
23 "श्रापित हो वो जो अपणी सास्सू कै गैल कुकर्म करै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
24 "श्रापित हो वो जो किसे नै लुह्क कै मारै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
25 "श्रापित हो वो जो बेकसूर माणस कै मारण कै खात्तर घूस ले। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"
26 "श्रापित हो वो जो इस नियम-कायदे कै वचनां नै मानकै पूरा ना करै। फेर सारे माणस कहवैं, आमीन।"