1 "जिसके अण्ड कुचले गये या लिंग काट दिया गया हो वो यहोवा की सभा म्ह ना आण पावै।"
2 "कोए कुकर्म तै पैदा होया ओड़ भी यहोवा की सभा म्ह ना आण पावै; बल्के दस पीढ़ी तक उसकै वंश का कोए यहोवा की सभा म्ह न्ही आण पावै।"
3 "कोए अम्मोनी या मोआबी यहोवा की सभा म्ह न्ही आण पावै; उनकी दसमी पीढ़ी ताहीं कोए यहोवा की सभा म्ह कदे न्ही आण पावै; 4 इस कारण तै के जिब थम मिस्र देश तै लिकड़कै आओ थे फेर उननै अन्न-पाणी लेकै राह म्ह थारै तै मिलण न्ही आए, अर न्यू भी के उननै अराम्नहरैम देश कै पतोर नगर आळे बोर के बेट्टे बिलाम ताहीं तन्नै श्राप देण कै खात्तर दक्षिणा दी। 5 पर तेरे परमेसवर यहोवा नै बिलाम की न्ही सुणी; बल्के तेरे परमेसवर यहोवा नै तेरै खात्तर उसकै श्राप ताहीं आशीष म्ह बदल दिया, ज्यांतै के तेरा परमेसवर यहोवा तेरै तै प्यार राक्खै था। 6 तू जिन्दगी भर उनकी राज्जी-खुशी अर भलाई कदे ना चाहिये।"
7 "किसे एदोमी तै नफरत ना करिये, क्यूँके वो तेरा भाई सै; किसे मिस्री तै भी नफरत ना करिये, क्यूँके उसकै देश म्ह तू परदेशी होकै रह्या था। 8 उनकै जो पड़पोत्ते पैदा हों वे यहोवा की सभा म्ह आण पावै।"
9 "जिब तू दुश्मनां तै लड़ण नै जाकै छावणी डालै, फेर सारे ढाळ की गलत बात्तां तै बच्या रहिये। 10 जै तेरै बिचाळै कोए आदमी उस अशुद्धता तै जो रात नै खुद तै खुद होया करै सै अशुद्ध होया हो, तो वो छावणी तै बाहर जावै, अर छावणी कै भित्तर ना आवै; 11 पर साँझ तै कुछ पैहल्या वो स्नान करै, अर जिब सूरज डूब जावै फेर छावणी म्ह आवै।"
12 "छावणी कै बाहर शौच-स्थान बणाईये, अर शौच कै खात्तर उड़ैए जाया करिये; 13 अर तेरै धोरै हथियारां म्ह एक खुरपी भी रहवै; अर जिब तू दिशा फिरण नै बैठ्ठै, फेर उसतै खोदकै अपणे मल ताहीं ढक दिये। 14 क्यूँके तेरा परमेसवर यहोवा तन्नै बचाण अर तेरे बैरियाँ ताहीं तेरै तै हरवाण नै तेरी छावणी कै बीच घूमदा रहवैगा, ज्यांतै तेरी छावणी पवित्र रहणी चाहिये, इसा ना हो के वो तेरै बिचाळै कोए अशुद्ध चीज देखकै तेरै तै फिर ज्या।"
15 "जो नौक्कर अपणे माल्लिक कै धोरै तै भाजकै तेरी शरण लेवै उस ताहीं उसकै माल्लिक कै हाथ ना पकड़ा दिये; 16 वो तेरे बिचाळै जो नगर उस ताहीं आच्छा लाग्गे उस्से म्ह तेरै गैल रहण पावै; अर तू उसपै अत्याचार ना करिये।"
17 "इस्राएली बिरबानियाँ म्ह तै कोए देवदासी ना हो, अर ना इस्राएल के माणसां म्ह तै कोए आदमी इसा बुरा काम करण आळा हो। 18 तू वेश्यापण की कमाई या कुत्ते की कमाई किसे मन्नत नै पूरी करण कै खात्तर अपणे परमेसवर यहोवा कै घर म्ह ना ल्याईये; क्यूँके तेरे परमेसवर यहोवा कै धोरै ये दोन्नु की दोन्नु कमाई घृणित काम सै।"
19 "अपणे किसे भाई नै ब्याज पै कर्ज ना दिये, चाहे रुपया हो, चाहे खाण-पीण की हों, चाहे कोए भी चीज हो जो ब्याज पै दी जावै सै, उस ताहीं ब्याज पै ना दिये। 20 तू परदेशी नै ब्याज पै कर्ज तो दे, पर अपणे किसे भाई तै इसा ना करिये, ताके जिस देश का हकदार होण ताहीं तू जाण लागरया सै, ओड़ै जिस-जिस काम म्ह अपणा हाथ लगावै, उन सारया म्ह तेरा परमेसवर यहोवा तन्नै आशीष देवै।"
21 "जिब तू अपणे परमेसवर यहोवा कै खात्तर मन्नत मान्नै, तो उस ताहीं पूरा करण म्ह देर ना करिये; क्यूँके तेरा परमेसवर यहोवा उसनै जरुर तेरै तै ले लेवैगा, अर देर करण तै तू पापी ठहरैगा। 22 पर जै तू मन्नत ना मान्नै, तो तेरा कोए पाप न्ही। 23 जो कुछ तेरै मुँह तै लिकड़े उसकै पूरा करण म्ह चौकसी करिये; तू अपणे मुँह तै वचन देकै अपणी मर्जी तै अपणे परमेसवर यहोवा की जिसी मन्नत मान्नै, उस्से तरियां ए आजादी तै उस ताहीं पूरा करिये।"
24 "जिब तू किसे दुसरे के अंगूर के बाग म्ह जावै, फेर पेट भर मन मान्ने अंगूर खा तो खा, पर अपणे बरतन म्ह कुछ न्ही राखिये। 25 अर जिब तू किसे दुसरे कै खड़े खेत म्ह जावै, फेर तू हाथ तै गेहूँ की बाल तोड़ सकै सै, पर किसे दुसरे कै खड़े खेत पै दराती ना लगाईये।"