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उत्पत्ति 1:20-24

पाँचवाँ दिन-मछलियाँ अर पंछी

20 फेर परमेसवर नै कह्या, "पाणी जिन्दा प्राणियाँ तै घणाए भर जावै, अर पंछी धरती कै उप्पर अकास कै बीच म्ह उड़ै।" 21 इस करकै परमेसवर नै न्यारे-न्यारे ढाळ के बड़े-बड़े जल-जन्तुआं की, अर उन सारे जिन्दे प्राणियाँ की भी सृष्टि करी जो चाल्‍लै-फिरै सैं जिनतै पाणी घणाए भरग्या, अर हरेक ढाळ कै उड़ण आळे पंछियाँ की भी सृष्टि करी; अर परमेसवर नै देख्या के आच्छा सै। 22 परमेसवर नै यो कहकै उन ताहीं आशीर्वाद दिया1:22 परमेसवर नै यो कहकै उन ताहीं आशीष दी: आशीष देण का मतलब कामना करणा सै अर उरै परमेसवर के सन्दर्भ म्ह इसका मतलब आशीष पाण आळे खात्तर कुछ आच्छा करण का इरादा करणा।, "फूल्‍लो-फळो, अर समुन्दर कै पाणी म्ह भर जाओ, अर पंछी धरती पै बढ़ै।" 23 अर साँझ होई फेर सबेरा होया। इस तरियां पाँचवाँ दिन होग्या।

छठा दिन-धरती के जीव-जन्तु अर माणस

24 फेर परमेसवर नै कह्या, "धरती तै हरेक ढाळ के जिन्दा प्राणी, यानिके घरेलू पशु, अर रेंगण आळे जन्तु, अर धरती पै बण म्ह रहण आळे पशु, हर किस्म के मुताबिक पैदा हो," अर उस्से तरियां ए होग्या।

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