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उत्पत्ति 48

जरिटयाँ आश

1 इन ां इसिकहा, ", िै।" मनशअर एपअपण्‍टयाँ उसकचला। 2 िबतिे, "आण रहयै," इसएल अपणे-आपनसमगया। 3 अर कहा, "सरवशकिपरमसवर कननगर ीं दरशन आशी, 4 अर कहा, , तन्‍फळवनकरकबढ़ाा, अर तन्‍य-रमणडळबणा, अर िुँा, िसतधरतसदीं उनकबणरहवै।’ 5 अर इब ्‍े, िआण हलैं, हरें; िितरिां अर िैं, उसतरिां एपअर मनशहरें। 6 अर उनकसनो, ठहरें; पर टवबखत अपणईयाँ ़ी िैंे। 7 िपदआऊा, एपचण ़ी-हलकनै, , मरगी; अर मन्‍उसतआड़ै, िएपतलहम नगर ै, उसउस ीं ी।"

8 इसएल ििे, अर उसनछया, "ैं?" 9 अपणिकहा, "ैं, परमसवर ीं उरिैं।" उसनकहा, "उनन, उन ीं आशँ।" 10 इसएल ां शऩारण धळी, उरीं उसनकम िा। उननउसका; अर उसनउन ीं मकगळ लगिा। 11 इसएल कहा, "मन्‍आस ी, ुँकदखण ा: पर , परमसवर ीं ़ी िै।" 12 उन ्‍ळकां ीं अपणिटनां िहटअर अपणुँबळ धरतपडदण्‍डवत करया। 13 उन ीं ै, िएपीं अपणै, इसएल ओळपड़े, अर मनशीं अपणओळै, इसएल पड़े, उननउसका। 14 इसएल अपणबढ़ाएपिा, अर अपणओळबढ़ामनशिधर िा; उसनण-बझकइसकरया; मनशा। 15 उसनआशकहा, "परमसवर िसकवज अबहम अर इसह्‍े, परमसवर जनआज ितक बणै; 16 अर मन्‍़ाआयै, इब इन रयां आशे; अर अर प-दअबहम अर इसहै; अर धरतघणबढै़।"

17 ििअपणएपिधरयै, उस ीं ी; ांउसनअपणिइस िपकडिा, एपिमनशिधरदे। 18 अर अपणिकहा, "िा, इसी; ूँै; अपणइसकिधर" 19 पर उसककहा, "ी, , े, इस आचूं ि इसतणसां एक मणडळी, अर महा, इसकइसतघणमहा, अर उसकघणिकड़ैी।" 20 उसनउसिकहकउन ीं आशिा, "इसएलणस े-इसआशिकरैंे, परमसवर तन्‍एपअर मनशतरिां बणे,’" अर उसनमनशहलएपिा। 21 इसएल कहा, ", मरण ूं, पर परमसवर रहवा, अर ीं ितरां पस ोंहचा। 22 अर तन्‍ईयाँ घणधरत48:22 घणी धरती शेकेम शहर एक िूं, िीं मन्‍एमिां अपणतलवअर धनबल िै।"

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