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Gênesis 1

ि इति

1 शरआत परमसवर अकअर धरति करी। 2 अर धरतअर नसपड़ी ी, अर गहरउपपर अना; अर परमसवर आतउपपर मणडरा।

हलिन-उजि

3 परमसवर कहा, "उजिो,"1:3 पैहले दिन का काम उजियाळे नै अस्तित्व म्ह ल्याणा था। उरै स्पष्ट रूप तै योजना, पिछले पद बताए गए एक दोष, यानी अँधेरे नै दूर करणा सै। उजिा। 4 अर परमसवर उजिीं आच1:4 परमेसवर नै उजियाळे ताहीं देख्या के आच्छा सै परमेसवर अपणे काम पै विचार करै सै, अर उस काम के उत्तमता के बोध तै तृप्ति की भावना प्राप्त करै सै।; अर परमसवर उजिीं करया। 5 अर परमसवर उजिीं िअर कहा। अर ाँसबा। इस तरिां हलिा।

सरिन-अक

6 परमसवर कह1:6 फेर परमेसवर नै कह्या: इस तै हम यो सिखा सां वो ना केवल सै, बल्के इसा सै जो अपणी इच्छा नै व्यक्त कर सकै सै अर अपणे बणाए होया कै साथ बातचीत कर सकै सै। वो ना केवल अपणी सृष्टि के जरिये प्रगट होवै सै बल्के खुद भी अपणे आपनै प्रगट करै सै। , "िएक इसअनतर िां बट ै।" 7 परमसवर एक अनतर करयअर उसकतळअर उसकउपपर ीं ा-करया; अर उसतरिां ा। 8 अर परमसवर उस अनतर ीं अककहा। अर ाँसबा। इस तरिां सरिा।

सरिन-सधरतअर ़-

9 परमसवर कहा, "अकतळएक जगहां कठअर धरतिे," अर उसतरिां ा। 10 अर परमसवर जगहां धरतकहा, अर कठा, उसतउसनसमदर कहा; अर परमसवर आचै। 11 परमसवर कहा, "धरतहर, अर जआळे-ें, अर फळ आळिनकउनएक-एक िैं, धरतउगै," अर उसतरिां ा। 12 इस तरिां धरतहर, अर े-िअपणी-अपणििै, अर फळ आळिनके-उनैं, उगे; अर परमसवर आचै। 13 अर ाँसबा। इस तरिां सरिा।

िन-सरज, ाँअर

14 परमसवर कहा, "िकरण तर अकअनतर िाँ ो; अर िों, अर सहबखत ै, अर िां, अर ्‍ां रण ों; 15 अर ि अकधरताँदणआळठहरै," अर उसतरिां ा। 16 परमसवर बड़ी िाँ बण; उन बड़ी ि ीं िकरण तर, अर ीं करण तर बणा; अर बणे। 17 परमसवर उन ीं अकांधरताँदणें, 18 अर िअर करै, अर ाँदणकरै; अर परमसवर आचै। 19 ाँअर सबा। इस तरिां िा।

ाँचवाँ िन-मछलिाँ अर

20 परमसवर कहा, "ििाँ घणभर ै, अर धरतउपपर अकउड़ै।" 21 इस करकपरमसवर े-बड़े-बड़े जल-जनी, अर उन ििाँ ि कर्‍ै-िैं िनतघणभरगा, अर हरउडआळिाँ ि करी; अर परमसवर आचै। 22 परमसवर कहकउन ीं आशि1:22 परमेसवर नै यो कहकै उन ताहीं आशीष दी: आशीष देण का मतलब कामना करणा सै अर उरै परमेसवर के सन्दर्भ म्ह इसका मतलब आशीष पाण आळे खात्तर कुछ आच्छा करण का इरादा करणा।, "्‍ो-फळो, अर समदर भर , अर धरतबढ़ै।" 23 अर ाँसबा। इस तरिां ाँचवाँ िा।

छठिन-धरतव-जनअर णस

24 परमसवर कहा, "धरतहरिी, िघरपशु, अर ेंगण आळजनु, अर धरतबण रहण आळपशु, हर ििो," अर उसतरिां ा। 25 इस तरिां परमसवर धरतअर हरगळी-पशीं, अर हरघरपशीं, अर हरधरतेंगण आळजनीं बणा; अर परमसवर आचै।

26 परमसवर कहा, "हम णस1:26 मनुष्य : मनुष्य नई प्रजाति सै, वो खास तौर पै इस धरती के और तरियां के प्राणियाँ तै न्यारा सै। अपणवरि1:26 अपणे स्वरूप के मुताबिक : यानी अपणी समानता म्ह। मनुष्य का सुर्ग तै सम्बन्ध सै अर इस धरती का कोए भी प्राणी न्ही सै अपणसमनतबणां; अर समदर मछलिाँ, अर अकिाँ, अर घरपशं, अर धरतै, अर ेंगण आळजनधरतेंैं, हक ै।" 27 परमसवर अपणवरणस ीं रचा, अपणवरपरमसवर णस ीं बणा; नर अर उसनणस ि करी। 28 अर परमसवर उन ीं आशिा; अर उनतकहा, "्‍ो-फळो, अर धरतभर , अर उस ीं अपणबस कर ो; अर समदर मछलिाँ, अर अकिाँ, अर धरतेंगण आळजनहक ो।" 29 परमसवर उनतकहा, "ो, ितनजआळे-ें धरतउपपर ैं अर ितनजआळफळ ै, मन्‍ीं िैं; तर ैं; 30 अर ितनधरतपशु, अर अकी, अर धरतेंगण आळजनैं, िवन ैं, उन सबकतर मन्‍हरे-हऱ-ें िैं," अर उसतरिां ा। 31 परमसवर िबणा, िा, ा, घणआचै। अर ाँसबा। इस तरिां छठिा।

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