4 अर परमेसवर नै उजियाळे ताहीं देख्या के आच्छा सै1:4 परमेसवर नै उजियाळे ताहीं देख्या के आच्छा सै परमेसवर अपणे काम पै विचार करै सै, अर उस काम के उत्तमता के बोध तै तृप्ति की भावना प्राप्त करै सै।; अर परमेसवर नै उजियाळे ताहीं अँधेरे तै न्यारा करया। 5 अर परमेसवर नै उजियाळे ताहीं दिन अर अँधेरे तै रात कह्या। अर साँझ होई फेर सबेरा होया। इस तरियां पैहला दिन होग्या।
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