भाषा म्ह गड़बड़ी
1 सारी धरती पै एक ए भाषा, अर एक ए बोल्ली थी। 2 उस बखत माणस पूरब की ओड़ चाल्दे-चाल्दे शिनार देश म्ह एक मैदान पाकै उस म्ह बसगे। 3 फेर वे आप्पस म्ह कहण लाग्गे, "आओ, हम ईट बणा-बणाकै आच्छी तरियां आग म्ह पकावां।" अर उननै पत्थर की जगहां ईट तै, अर माट्टी की गारा की जगहां चूने तै काम लिया। 4 फेर उननै कह्या, "आओ, हम एक नगर अर एक मीनार बणा लेवां, जिसकी चोट्टी अकास तक पोहचै, इस तरियां हम अपणा नाम महान करां, इसा ना हो के म्हारै ताहीं सारी धरती पै फैलणा पड़ै।" 5 जिब माणस नगर अर मीनार बणाण लाग्गे; फेर यहोवा उननै देखण खात्तर उतर आया। 6 अर यहोवा नै कह्या, "मै के देक्खूँ सूं, के सारे एक ए दल के सैं अर भाषा भी उन सारया की एक सी सै, अर उननै इसाए काम भी शरु करया; अर इब जो कुछ वे करण की कोशिश करैगें, उसतै कुछ भी उनकै खात्तर मुश्किल न्ही होगा। 7 इस करकै आओ, हम उतरकै उनकी भाषा म्ह गड़बड़ी गेरां, ताके वे एक दुसरे की बोल्ली नै न्ही समझ सकै।" 8 इस तरियां यहोवा नै उन ताहीं ओड़ै तै सारी धरती पै फैला दिया; अर उननै उस नगर का बणाणा छोड़ दिया। 9 इस कारण उस नगर का नाम बाबेल पड़या; क्यूँके सारी धरती की भाषा म्ह जो गड़बड़ी सै, वा यहोवा नै ओड़ैए करी, अर ओड़ै तै यहोवा नै माणसां ताहीं सारी धरती पै फैला दिया।