पाप की शरुआत
1 यहोवा परमेसवर नै जितने जंगळी-पशु बणाए थे, उन सारया म्ह तै साँप मक्कार था, अर उसनै जनान्नी तै पूच्छया, "के सच म्ह ए परमेसवर नै कह्या सै, ‘के थम इस बाग के किसे दरखत का फळ ना खाईयों’?" 2 जनान्नी नै साँप तै कह्या, "इस बाग के दरखतां के फळ हम खा सकां सां; 3 पर जो दरखत बाग कै बिचाळै सै, उसके फळ के बारें म्ह परमेसवर नै कह्या सै के ना तो थम उसनै खाईयों अर ना ए उस ताहीं छूईयो, न्ही तो मर जाओगे।" 4 फेर साँप नै जनान्नी तै कह्या, "थम पक्का न्ही मरोगे 5 बल्के परमेसवर खुद जाणै सै के जिब थम उसका फळ खाओगे फेर थारी3:5 इसका मतलब यो सै के "जाणणा, समझणा, महसूस करणा" आँख खुल जावैगी, अर थम भले-बुरे का ज्ञान पाकै परमेसवर कै समान हो जाओगे।"