यूसुफ का सपना
5 यूसुफ नै एक सपना देख्या, अर अपणे भाईयाँ तै उसका जिक्र करया; फेर वे उसतै और भी घणा बैर करण लाग्गे। 7 आपां सारे खेत म्ह पूळें बांधण लागरे सां, अर मै के देक्खूँ सूं के मेरा पूळा उठकै सीध्धा खड्या होग्या; फेर थारे पूळयाँ नै मेरै पूळे ताहीं च्यांरु ओड़ तै घेर लिया अर उस ताहीं दण्डवत करया।" 9 फेर उसनै एक और सपना देख्या, अर अपणे भाईयाँ तै उसकै बारै म्ह भी बताया, "सुणो, मन्नै एक और सपना देख्या सै, के सूरज, चाँद, अर ग्यारह तारे मन्नै दण्डवत करण लागरे सैं।"
24 अर यूसुफ ताहीं ठाकै गड्ढे म्ह गेर दिया। वो गड्डा सूखरया था, अर उस म्ह पाणी कोनी था।
28 उस बखत मिद्यानी व्यापारी ओड़ै तै होकै उनकै धोरै तै गुजरे। इस करकै यूसुफ के भाईयाँ नै उस ताहीं उस गड्ढे म्ह तै खींचकै बाहर लिकाड्या, अर इश्माएली व्यापारी माणसां ताहीं चाँदी के बीस टुकड्या37:28 चाँदी के बीस टुकड्या एक गुलाम की कीमत 220 ग्राम चाँदी थी म्ह बेच दिया; अर वे यूसुफ नै मिस्र देश म्ह लेगे। 31 फेर उननै यूसुफ का अंगरखा लिया, अर एक बकरा मारकै उसकै लहू म्ह उस ताहीं डुबा दिया। 33 उसनै उस ताहीं पिच्छाण लिया, अर कह्या, "हाँ यो मेरै ए बेट्टे का अंगरखा सै; किसे दुष्ट पशु नै उस ताहीं खा लिया; जरुर यूसुफ के टुकड़े-टुकड़े कर दिये होंगे।"