यूसुफ का सपना
5 यूसुफ नै एक सपना देख्या, अर अपणे भाईयाँ तै उसका जिक्र करया; फेर वे उसतै और भी घणा बैर करण लाग्गे। 6 उसनै उनतै कह्या, "जो सपना मन्नै देख्या सै, उस ताहीं सुणो 7 आपां सारे खेत म्ह पूळें बांधण लागरे सां, अर मै के देक्खूँ सूं के मेरा पूळा उठकै सीध्धा खड्या होग्या; फेर थारे पूळयाँ नै मेरै पूळे ताहीं च्यांरु ओड़ तै घेर लिया अर उस ताहीं दण्डवत करया।" 8 फेर उसके भाईयाँ नै उसतै कह्या, "के साच्चए तू म्हारै उप्पर राज करैगा? तो के तू साच्चए म्हारै पै राज करैगा?" ज्यांतै वे उसकै सपने अर उसकी बात्तां कै कारण उसतै और भी घणा बैर करण लाग्गे। 9 फेर उसनै एक और सपना देख्या, अर अपणे भाईयाँ तै उसकै बारै म्ह भी बताया, "सुणो, मन्नै एक और सपना देख्या सै, के सूरज, चाँद, अर ग्यारह तारे मन्नै दण्डवत करण लागरे सैं।" 10 यो सपना उसनै अपणे पिता, अर भाईयाँ तै बताया; फेर उसकै पिता नै उसतै धमकाकै कह्या, "यो किसा सपना सै जो तन्नै देख्या सै? के साच्चए मै अर तेरी माँ अर तेरे भाई तेरे आग्गै धरती पै पड़कै दण्डवत करागें?" 11 उसके भाई तो उसतै जळण तै भरे थे; पर उसकै पिता नै उसकी सारी बात्तां ताहीं याद राख्या।