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उत्पत्ति 41:1,16,33,40,46,51,52

फिरौन का सपना

1 पूरे दो साल कै बीतण पै फिरौन नै यो सपना देख्या के वो नील नदी कै किनारे खड्या सै।

16 यूसुफ नै फिरौन तै कह्या, हे महान राजा, "मै तो किमे न्ही जाणदा: पर परमेसवर ए फिरौन नै शुभ वचन देवैगा।"

33 इस करकै इब मेरी या सलाह सै, फिरौन किसे भी समझदार अर बुद्धिमान माणस नै ढूँढ़ कै उसनै मिस्र देश का प्रधानमंत्री बणा दे।

40 इस करकै तू मेरै घर का अधिकारी होवैगा, अर तेरे हुकम कै मुताबिक मेरी सारी प्रजा चाल्‍लैगी, सिर्फ राजगद्दी कै बारै म्ह मै तेरे तै बड़ा ठहरूँगा।"

46 जिब यूसुफ मिस्र देश कै राजा फिरौन कै स्याम्ही खड्या होया, तो वो तीस साल का था। वो फिरौन कै स्याम्ही तै लिकड़कै सारे मिस्र देश म्ह दौरा करण लाग्या।

51 अर यूसुफ नै अपणे जेठ्ठे बेट्टे का नाम न्यू कहकै मनश्शे41:51 मनश्शे भूलण का कारण धरया, के "परमेसवर नै मेरै तै मेरा सारा क्ळेश, अर मेरे पिता का सारा घराना भूला दिया सै।" 52 दुसरे का नाम उसनै न्यू कहकै एप्रैम41:52 एप्रैम मन्‍नै दो बार फलवंत करया धरया, के "मन्‍नै दुख भोग्गण कै देश म्ह परमेसवर नै फलवन्त करया सै।"

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