3 अर एक सौ पचास दिन कै बाद पाणी धरती पै तै लगातार घटण लाग्या। 4 सातमै महिन्ने कै सत्रहवें दिन, जहाज अरारात नाम के पहाड़ पै टिक ग्या।
11 जिब कबूतरी साँझ कै बखत उसकै धोरै आगी, तो के देख्या के उसकी चोंच म्ह जैतून का एक नया पत्ता सै; इसतै नूह नै जाण लिया, के पाणी धरती पै घट ग्या सै।
13 जिस बखत नूह की उम्र के छः सौ एक साल होई, उसके पैहले महिन्ने कै पैहल्ड़े दिन पाणी धरती पै तै सूख ग्या। फेर नूह नै जहाज की छात खोलकै देख्या के धरती सूखगी सै।
नूह के जरिये होमबलि चढ़ाणा
20 फेर नूह नै यहोवा कै खात्तर एक वेदी बणाई; अर सारे शुद्ध पशुआं, अर सारे शुद्ध पंछियाँ म्ह तै, लेकै वेदी पै होमबलि चढ़ाया।