18 आकाश का रचनेवाला याहवेह,
वही परमेश्वर;
जिन्होंने पृथ्वी की रचना कर उसे रूप दिया,
और उन्होंने इसे स्थिर किया;
तथा इसमें एक भी स्थान ऐसा नहीं जो बसाया गया न हो,
लेकिन इसको इसलिये बनाया कि इसे बसाया जाये—
वह यों कहता है:
"मैं ही वह याहवेह हूं,
अन्य कोई भी नहीं.