3 वह तो मनुष्यों द्वारा तुच्छ जाना जाता तथा त्यागा हुआ था,
वह दुःखी पुरुष था, रोगों से परिचित था.
उसे देखकर लोग अपना मुंह छिपा लेते हैं
वह तुच्छ जाना गया, और हमने उसके महत्व को न जाना.
4 उसने हमारे रोगों को सह लिया और उठा लिया
उसने हमारे ही दुखों को अपने ऊपर ले लिया,
स्वयं हमने उसे परमेश्वर द्वारा मारा कूटा
और दुर्दशा में पड़ा हुआ समझा.
5 हमारे पापों के कारण ही उसे रौंदा गया,
हमारे अधर्म के कामों के कारण वह कुचला गया;
उसके कोड़े खाने से,
हम चंगे हुए.