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यशायाह 55

ों िरण

1 "सब ो,

आओ;

िनकधन नहीं,

आकर खमध

और

िं!

2 नहीं उस पर धन ों खरकरतो?

िससनहीं भरतउसकिों हनत करतो?

ों, तब उततम वसओगे,

और ्‍ोंे.

3 तथआओ;

ि िरह सको.

और ैं सदांूंा,

ैंिा.

4 ैंउसों िगव,

रधऔर आजबनै.

5 अब इसएल पविपरमवर हव, ऐसों े, िें नतनहीं,

और ऐसजनता, ें नततक नहीं, आएगी,

ोंि ें परमवर यमिै."

6 जब तक हविसकतैं उनें ो;

जब तक वह ैं उनें ो.

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