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Isaías 57

1 धरयकि ैं,

और इस िंनहीं करता;

भकउठिैं,

परनहीं चता.

धरजन आनपर

बचनिउठिैं.

2 ांि पहचनतैं,

अपनि57:2 बिछौने मृत्यु का भी हो सकता है पर आरैं;

चलतैं.

3 "परगरनी,

यभिऔर उसकयहां आओ!

4 िपर सतो?

िसकिुंऐसरह

िपर िलतो?

अत

नहीं ो?

5 सब हरऔर ों ें

तथचटों ें अपनलकों वध करतरहतो.

6 चटउन िकनपतथरों ै;

वहऔर ै.

उनीं अन्‍नबलि और बलि चढ़ाो.

इन सबसमन ांएगा?

7 परवत पर मनअपनिलगै;

और मनवहीं कर बलि चढ़ाै.

8 तथखट

मनअपनअनवतिबनै, मनअपनआपकझसकर िै.

मनवहां अपनि,

तब मनअपनिबढ़ा िा;

मनउनकअपनिएक बनिा,

िउनकििगया,

और उनकनगशरों पर आसकि नजी!

9 िलनिमन

तथरवृंकर उसेंिा.

मनों

और अधें अपना!

10 रण थक े,

िमनयह कहि, यरयह.

ममें नए बल ,

तब थकनहीं.

11 "वह िससडरत

जब मनझसकहा,

तथगई,

मनें चनिा?

ैं बहसमय तक रह

इस रण भय नहीं नती?

12 ैं धरएवों बतूंा,

ियह िअचनहीं ा.

13 पर,

िां रककरें!

िंयह ि हवउनें उड़ा एगी,

वल उनें कर ी.

परपर भररखतैं,

वह अधिोंे,

तथवह पविपरवत एगा."

भगदयों हवांि

14 तब यह कहएगा:

"िकरो, िकरो, ांि ांधकर जमबन!

हर एक वट रजहट."

15 ोंि मह, उततम और सदा-सरवदिरहतैं—

िनकपविै, ों कहतैं:

"ैं एवपविें िकरतूं,

और ुःतथनमों रहतूं,

ि ैं नमऔर ुः

ों मन ूं.

16 ोंि ैं सदा-सरवदद-विकरतरहूंा,

ैं सरवदरहूंा,

ोंि आतबनैं—

और मनिैं.

17 उसकलच रण ैं उससिकर;

उसकुःिऔर ुंिा,

पर वह अपनइचचलगया.

18 ैंउसकलचलन ै, िअब उसककरूंा;

ैं उसचलूंतथउसककरनों ांि ूंा,

19 ैं उनकोंों फल रचनूं.

ैं उनें ांि, और ैं उनें ैं ांि ूंा,"

यह हववचन ै, "ैं उसकरूंा."

20 परलहरगर समै,

िरह नहीं सकता,

उसकतरें कचरऔर चडउछलतरहतैं.

21 परमवर वचन ै, "ों िांि नहीं."

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