3 ‘ऐसा क्यों हुआ कि हमने उपवास किया,
किंतु हमारी ओर आपका ध्यान ही नहीं गया?
हमने दुःख उठाया,
किंतु आपको दिखाई ही नहीं दिया?’
"इसका कारण यह है कि जब तुम उपवास करते हो, तब तुम अपनी अभिलाषाओं पर नियंत्रण नहीं रखते,
तुम उस समय अपने सेवकों को कष्ट देते हो.
4 तुम यह समझ लो कि तुम उपवास भी करते हो तथा इसके साथ साथ वाद-विवाद,
तथा कलह भी करते हो और लड़ते झगड़ते हो.
उस प्रकार के उपवास से यह संभव ही नहीं
कि तुम्हारी पुकार सुनी जाएगी.
5 क्या ऐसा होता है उपवास,
जो कोई स्वयं को दीन बनाए?
या कोई सिर झुकाए या
टाट एवं राख फैलाकर बैठे?
क्या इसे ही तुम उपवास कहोगे,
क्या ऐसा उपवास याहवेह ग्रहण करेंगे?
6 "क्या यही वह उपवास नहीं, जो मुझे खुशी देता है:
वह अंधेर सहने के बंधन को तोड़ दे,
जूए उतार फेंके और उनको छुड़ा लिया जाए?