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यशायाह 58

3 ऐसों ि हमनउपविा,

िंहमओर आपकनहीं गया?

हमनुःउठा,

िंआपकिनहीं िा?’

"इसकरण यह ि जब उपवकरतो, तब अपनअभिपर िरण नहीं रखते,

उस समय अपनवकों कषो.

4 यह समझ ि उपवकरततथइसकद-वि,

तथकलह करतऔर लडझगडो.

उस रकउपवयह भव नहीं

ि एगी.

5 ऐसउपव,

वयबन?

ि

एवकर े?

इसउपवकहे,

ऐसउपवहवरहण करेंे?

6 "यहवह उपवनहीं, ै:

वह सहनधन े,

उतेंऔर उनक़ा ि?

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