न्याय और आशा
1 याहवेह यों कहते हैं:
"स्वर्ग मेरा सिंहासन है,
तथा पृथ्वी मेरे चरणों की चौकी है.
तुम मेरे लिये कैसा भवन बनाओगे?
कहां है वह जगह जहां मैं आराम कर सकूंगा?
2 क्योंकि ये सब मेरे ही हाथों से बने,
और ये सब मेरे ही हैं."
यह याहवेह का वचन है.
"परंतु मैं उसी का ध्यान रखूंगा:
जो व्यक्ति दीन और दुःखी हो,
तथा जो मेरे आदेशों का पालन सच्चाई से करेगा.