2 क्योंकि ये सब मेरे ही हाथों से बने,
और ये सब मेरे ही हैं."
यह याहवेह का वचन है.
"परंतु मैं उसी का ध्यान रखूंगा:
जो व्यक्ति दीन और दुःखी हो,
तथा जो मेरे आदेशों का पालन सच्चाई से करेगा.
2 क्योंकि ये सब मेरे ही हाथों से बने,
और ये सब मेरे ही हैं."
यह याहवेह का वचन है.
"परंतु मैं उसी का ध्यान रखूंगा:
जो व्यक्ति दीन और दुःखी हो,
तथा जो मेरे आदेशों का पालन सच्चाई से करेगा.
2 यहोवा की यह वाणी है, ये सब वस्तुएँ मेरे ही हाथ की बनाई हुई हैं, इसलिए ये सब मेरी ही हैं। परन्तु मैं उसी की ओर दृष्टि करूँगा जो दीन और खेदित मन66:2 दीन और खेदित मन: ऐसा मन जो टूटा हुआ हो, कुचला हुआ हो या पाप से अत्यधिक प्रभावित रहा हो। का हो, और मेरा वचन सुनकर थरथराता हो। (भज. 34:18, मत्ती 5:3)
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