15 दोत्ती-दोत्थी गअ एलिशो एक दास उझ़ुई, ज़ांऊं सह घअरा बागै निखल़अ, तेऊ भाल़अ कि अराम देशे सैना आसा रथ-घोल़ै पाई नगरी फेर-फिरदी गोटी दी! सह डेऊअ एलिशा सेटा संघा बोलअ, "मेरै मालक, हाम्हैं गोटै फेर-फिरदै, ऐबै किज़ै करनअ?"
16 एलिशा दैनअ ज़बाब, "तूह निं डरदअ लागै, ज़ुंण हाम्हां बाखा आसा, सह आसा तेऊ का बडअ ज़ुंण इना बाखा आसा।" 17 तेखअ किई एलिशा बिधाता सेटा प्राथणां, "बिधाता, तूह कर इहअ कि एऊ का लोल़ी शुझुअ!" बिधाता रहैऊअ तेऊ दासा का इहअ कि एलिशा फेर आसा धारा ज़ल़दी आगीए रथ अर घोल़ै।