12 "तीसरे साल जो दशमांश देण का साल ठहरया सै, जिब तू अपणी सारी ढाळ की बढ़दी का दशमांश नै काढ ले, फेर उस ताहीं लेवी, परदेशी, अनाथ, अर बिधवा ताहीं दिये, के वे तेरे फाटकां कै भित्तर खाकै तृप्त हों; 15 तू सुर्ग म्ह तै जो तेरा पवित्र धाम सै निगांह करकै अपणी प्रजा इस्राएल ताहीं आशीष दे, अर इस दूध अर शहद की धारा26:15 उपजाऊ धरती आळे देश की धरती पै आशीष दे, जिस ताहीं तन्नै म्हारे पूर्वजां तै खाई होई कसम कै मुताबिक म्हारै ताहीं दिया सै।’"
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