7 इन बात्तां कै बाद इसा होया, के उसकै माल्लिक की घरआळी नै यूसुफ पै आँख लगाई, अर कह्या, "मेरे गेल्या सो।" 8 पर उसनै मना करदे होए अपणे माल्लिक की घरआळी तै कह्या, "सुण, जो कुछ इस घर म्ह सै मेरै हाथ म्ह सै; उस ताहीं मेरा माल्लिक कुछ न्ही जाणदा, अर उसनै अपणा सारा किमे मेरै हाथ म्ह सौप दिया सै। 9 इस घर म्ह मेरै तै बड्ड़ा कोए कोनी; अर उसनै तेरे ताहीं छोड़, जो उसकी घरआळी सै; मेरै तै कुछ न्ही छुपाकै राख्या; ज्यांतै भला, मै इतणा बड़ा पाप करकै परमेसवर का कसूरवार क्यूँ बणु?" 10 अर इसा होया के वा रोज यूसुफ तै बात करदी रही, पर यूसुफ नै उसकी न्ही मान्नी के उसकै धोरै सोवै या उसकै गैल रहवै। 11 एक दिन के होया के यूसुफ अपणा काम-काज करण कै खात्तर घर म्ह गया, अर घर के नौकरां म्ह तै कोए भी घर म्ह न्ही था। 12 तो उस जनान्नी नै उसका कपड़ा पकड़कै कह्या, "मेरे गेल्या सो," पर वो अपणा कपड़ा उसकै हाथ म्ह छोड़कै भाजकै बाहर लिकड़ ग्या।