यूसुफ का खुद नै जाहिर करणा
1 फेर45:1 फेर जिब वो यहूदा की बात सुणण लाग रह्या था यूसुफ उन सबके स्याम्ही अपणे-आपनै रोक न्ही सक्या; जो उसकै लोवै-धोवै खड़े थे, अर रुक्का मारकै कह्या, "मेरै लोवै-धोवै के सारे माणसां नै बाहर भेज द्यो।" जिब यूसुफ नै खुद ताहीं भाईयाँ कै स्याम्ही जाहिर करया जिब उसकै धोरै कोए न्ही था। 2 फेर वो चिल्ला-चिल्लाकै रोण लाग्या; अर मिस्र देश के, अर फिरौन कै घर के माणसां नै भी इसकी खबर सुणी। 3 फेर यूसुफ अपणे भाईयाँ तै कहण लाग्या, "मै यूसुफ सूं, के मेरा पिता इब तक जीवै सै?" इसका जवाब उसके भाई न्ही दे सके; क्यूँके वे उसकै स्याम्ही घबरागे थे।