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यशायाह 61

हवि वर

1 पर रभहवआतै,

ोंि हवअभिि

ि उत़िों तक समिे,

तथुःमनवों ांि ूं,

ि िों िि तथिों ि

टकरचकरूं,

2 ि हवि वररचकरूं,

और हमपरमवर बदलिरच,

ि उन सभांि िें ैं,

3 ़िें िकर रहैं, उनें भसनहीं—

परुंदर पगड़ी ांूं,

ि उनकुःजगह,

आनलग

और उनकउदहटकर यश ओढओढ़ा

िससधरऔर हवलगकहलऔर

हवमहिरकट ो.

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