1 बिधाता बोला एरुशलेम नगरीए परज़ा लै इहअ,
"एरुशलेम नगरीए लोगो, ओर्ही-पोर्ही ठुर्हा नगरीए बाता!
फेर दैआ भाल़णीं! आप्पू बाखा दैआ नदर!
हाट्टै-बज़ारै भाल़ा सारै दी!
तम्हां का इहअ कुंण एक मणछ बी शुझिआ ज़ुंण भलअ करा
अर ज़ुंण बिधाता लै शुचअ-पाक्कअ आसा?
ज़ै तम्हां कुंण इहअ भेटे, तै हेरनी बिधाता एरुशलेम नगरी लै माफी छ़ाडी।
2 तज़ी बी खाआ तम्हैं मेरै सोह! तम्हैं हआ इहअ बोल्दै लागै दै,
‘हाम्हैं काढा ज़िऊंदै बिधाते सोह!’
पर तम्हैं खाआ झ़ुठै सोह।"
3 बिधाता, तूह रहा शुचै भाल़अ लागी!
तूह दैआ आपणीं परज़े धरनीं च़टैई पर तिन्नां निं दाह उझ़दी!
तंऐं कच़ुंच़रै तिंयां धरनीं पर तिंयां निं सुधर्नअ ई च़ाहंदै।
तिन्नैं आसा आपणैं मुंह टोल्हा का बी काठै डाहै दै बणाईं।
तिंयां निं पाप करनै का पिछ़ू हटदै ई आथी!
4 तैही लागअ हुंह सोठदअ, "एरुशलेम नगरीए लोग आसा ऐडै।
तिन्नां का निं थोघ ई आथी कि बिधाता तिन्नां लै केही ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै बोला!
तिंयां निं समझ़दै ई आथी कि बिधाता किज़ै च़ाहा कि तिंयां करे।
5 तैही डेऊणअ मुंह सैणैं सेटा लै, तिन्नां का लणअ मुंह खोज़ी।
तिन्नां का लोल़ी थोघ लागअ कि बिधाता तिन्नां लै केही ज़िन्दगी ज़िऊंणां लै बोला।
तिन्नां लोल़ी समझ़ आई कि बिधाता किज़ै च़ाहा कि तिंयां करे।"
पर तिन्नैं सोभी पाअ सह जूँ चोल़ी ज़ेथ बिधाता तिंयां जोचै तै।
तिन्नैं पाई तिंयां गल़ैऊंडी चोल़ी ज़ेथ तिंयां बान्हैं दै थिऐ।
6 तैही पल़णै बणें सिह तिन्नां मारदै चुटी।
रेगीस्ताना का एछणैं रुहलै संघा करनै तिन्नें धेल़ी-च़िरी ठोर-ठोर,
तिन्नें नगरी रहणैं च़राघ मारना लै ताखुई।
ज़ुंण बागै निखल़े, तिन्नां च़राघा करनै तिंयां धेल़ी-च़िरी खतम।
किल्हैकि तिन्नैं किऐ खास्सै पाप अर
तिंयां रहै कबल्लै बिधाता का दूर हंदै लागी।
7 बिधाता पुछ़ा यहूदे परज़ा का इहअ, "एरुशलेम, हुंह किल्है छ़ाडूं तेरै पापा लै माफी?
तम्हैं डेऊऐ मुंह छ़ाडी दूर अर
तम्हैं लागै तिन्नां देअआ पूज़दै ज़ुंण असली दी आथी ई निं।
हुंह रहअ मेरी परज़ा का तेभै तैणीं खैऊंदअ लागी ज़ेभै तैणीं तिंयां रज्ज़ै निं आथी,
पर तिन्नैं किई कंज़रैई अर तिन्नैं पाअ
आपणअ सारअ बगत कंज़रैई करना लै ज़ांऐं।
8 तिंयां आसा खाई-पिई रज्ज़ै दै बणें घोल़ै ज़िहै,
तिंयां रहा आपणैं साथी-संघीए बेटल़ी संघै कंझ़रदै लागी।
9 तिन्नां मणछा लै लणी मुंह बिधाता इना कदुष्ट कामां पिछ़ू सज़ा दैई,
एही ज़ाती लै लणअ मुंह बदल़अ दैई!
10 बाबेल देशे सैना डेऊणीं तिन्नें दाखे बागा बरैबाद करदै।
पर पठी बरैबाद निं तिन्नां करनै।
मुंह बिधाता बोल़णअ तिन्नां लै कि तिन्नां शाण्हीं काटा पोर्ही
किल्हैकि तिंयां शाण्हीं निं मेरी आथी।
11 इज़राईल अर यहूदा मुल्खे परज़ा किअ मुल्है हर गल्ला दी विश्वास घात।
अह गल्ल डाही मंऐं बिधाता बोली।
12 "मेरी परज़ा हुधूऐ मुल्है ई! तिंयां बोला इहअ,
‘बिधाता निं किछ़ करदअ! हाम्हां लै निं किछ़ आफ़त च़ाल्ली पल़ी,
नां हाम्हां संघै कहा जुध छ़ेल़णै अर नां हाम्हां लै नकाल़ पल़णअ।
13 गूर डेऊणैं बागरी ज़िहै दूर,
तिंयां खोज़ा आपणीं बाखा सह निं बिधातो समाद हंदअ।
ज़ुंण तिंयां इहअ बोलअ कि आफ़त पल़णीं, सह लोल़ी तिन्नें ई मुंडै पल़ी!’"
14 तैही बोलअ स्वर्गे सारी सैने मालक बिधाता मुखा इहअ,
"ईंयां लोग बोला एही नथोघी गल्ला!
ऐबै निखल़णैं मेरै बैण तेरी खाखा बाती आगी ज़िहै
ईंयां लोग हणैं तेता करै झ़ुका ज़िहै दझ़ी खतम।"
15 बिधाता बोला इहअ, "इज़राईलीओ, शूणां हुंह किज़ै बोला,
दूरा का छ़ाडणअ मुंह एक देश
कि सह तम्हां लै चुटी पल़े।
सह देश आसा पराणैं ज़मानै ओर्ही अर
आजू बी रहणअ सह खास्सै ज़मानै तैणीं।
तिन्नें निं तम्हां बोली-भाषा ई समझ़ एछणी कि तिंयां किज़ै गल्ला करा।
16 तिन्नां का आसा हारदै-मारदै अस्त्र-शस्त्र अर
तिंयां सोभै आसा महान जोधै।
17 तिन्नां करनी थारी खाणैं पिणें च़िज़ा अर साल-फसल खाई खतम।
थारै शोहरू-शोहरी पाणीं तिन्नां मारी।
थारै डागै-चैणें हेल़्ही बी पाणीं तिन्नां काटी अर
थारै दाख बाग अर फेडूए डाल़-बूट बी करनै तिन्नां बरैबाद।
तम्हैं आसा फेर-फिरदै उछ़टै गहल़ा आल़ी नगरीए आसरै रहै दै,
पर तेथ बस्सै दै लोग पाणै तलबारा करै मारी।"
18 बिधाता बोला इहअ, "तज़ी बी निं मुंह तिन्नां बनाशे धैल़ै आपणीं परज़ा पठी खतम हणैं दैणअ। 19 जेरमयाह, ज़ेभै तिंयां ताखा इहअ पुछ़े कि बिधाता हाम्हां लै इहअ किल्है दैनअ हणैं? तेभै खोज़ै तूह तिन्नां का इहअ, ‘तम्हैं छ़ाडअ बिधाता अर तम्हैं लागै आपणीं ज़ैगा होरी देअआ-देबीए च़ाकरी करदै। ऐबै पल़णीं तम्हां होरी देशे गलामी करनी अर पराई ज़ैगा बस्सणअ ज़ुंण थारी निं आथी।’"
20 बिधाता बोलअ इहअ,
"याकबे आद-लुआदा का खोज़ अर यहूदा सारै देशै बी खोज़ सोभी का कि हुंह बोला इहअ,
21 ‘तम्हैं नसकलै अर ऐडै मणछ दैआ मेरी गल्ला दी धैन,
आछी हंदी बी निं तम्हां का शुझदअ!
थारै कान, आसा पर तम्हां का निं शुण्हदअ!
22 हुंह आसा बिधाता, तम्हैं मेरअ अदर करी निं सकदै?
तम्हां मेरी डअर किल्है निं आथी?
मंऐं आसा समुंदरे सिऊंआं दी रेत डाहअ द कि
समुंदर जुगै-जुगै तैणीं तेऊ बाल़ा लंघी बागै निं निखल़े।
समुंदरा का निखल़ा बडी-बडी छ़ाल्ली पर तिंयां निं तैहा सिऊंआं लंघदी।
च़ाऐ समुंदर ज़िहअ क्रुंगे पर सह निं तेऊ बाल़ा चोल़ी बागै निखल़दअ!
23 पर तम्हैं मणछ आसा हठू! तम्हैं आसा द्रोही,
ज़िहअ हुंह बोला तिहअ निं तम्हैं शुणदै ई आथी!
तम्हैं हुऐ मुखा दूर अर तम्हैं आसा कबाता पेठै दै।
24 तम्हैं निं इहअ बी सोठदै कि मेरअ अदर लागा होए करनअ,
इहअ बी निं सोठदै कि हुंह परमेशर बिधाता बरशाऊआ सरग अर भराल़ बगती।
मंऐं आसा हर साल तम्हां लै ऋत डाही दी कि तम्हैं साल-फसल लऊए।
25 पर थारै पाप करनै पिछ़ू किऐ तम्हैं इना सोभी भली च़िज़ा का दूर।’
26 "जेरमयाह, मेरी परज़ा मांझ़ै आसा कई लोग कदुष्ट, तिंयां रहा लुक्की करै इहै ताखुई ज़िहै शकारी च़ेल्ली ढाकणा लै रहा ताखुई। तिंयां डाहा लोगा लै ज़ज़ाल़ छ़ैई। 27 ज़िहअ शकारी च़ेल्लू करै छ़ाब्बै भरा, तिहै आसा तिन्नैं आपणैं घअर लुटी-घशिट्टी करै भरै दै। तैही आसा तिंयां सेठ अर बलबान हुऐ दै, 28 तैही आसा तिंयां खुब्ब मोट्टै-धोटै हुऐ दै। तिन्नैं एतरै कदुष्ट काम कि तेते निं कोई गणांई ई आथी। छ़ुटै-मुक्कै दै लान्हैं लै निं तिंयां तिन्नों हक दैंदै, नां रैनै गरीब मणछा लै नसाफ दैंदै।
29 "पर मुंह लणी इना गल्ला पिछ़ू तिन्नां मणछा लै सज़ा दैई, ऐहा ज़ाती का लणअ मुंह बदल़अ लई। अह गल्ल डाही मंऐं बिधाता बोली। 30 अह यहूदा मुल्ख हुअ डरैऊंणअ अर रहैन करनै आल़ी गल्ला! 31 गूर आसा ज़ाथी झ़ुठी गल्ला प्रगट करदै लागै दै, ज़िहअ गूर बोला तेऊ साबै आसा प्रोहत राज़ करदै लागै दै, अर मेरी परज़ा आसा इना सोभी गल्ला लै सैहमत! पर खिरी ज़ांऊं ईंयां सोभै गल्ला खतम हणीं, तम्हां तेभै किज़ै करनअ?"