29 "बैहम हणैं पिछ़ू रिशे झ़गल़ैओ नबारण करनैओ बधान आसा अह ई, च़ाऐ कुंण बेटल़ी आपणैं मर्धा छ़ाडी होरी संघै छ़ोतली होए, 30 च़ाऐ कहा बेटल़ी आपणैं मर्धा लै बैहम होए अर तैहा खास्सी रिश लागा होए, तिन्नां करै मुंह बिधाता सम्हनै खल़ै, संघा करै प्रोहत एऊ बधाना पूरै।