ब्याह कै बारै म्ह नियम
13 "जै कोए आदमी किसे जनान्नी ताहीं ब्याह ले, अर उसकै धोरै जाण के बखत वो उस ताहीं अप्रिय लाग्गै, 14 अर वो उस जनान्नी की बदनाम्मी करै, अर न्यू कहकै उसपै कुकर्म का दोष लगावै, इस जनान्नी ताहीं मन्नै ब्याहया, अर जिब उसतै मेळ करया फेर उस म्ह कोए कुँवारी अवस्था के लक्खण ना पाए, 15 तो उस कन्या कै माँ-बाप उसके कुँवारीपण कै निशान लेकै नगर कै बुजुर्ग माणसां कै धोरै फाटक कै बाहर जावैं; 16 अर उस कन्या का पिता बुजुर्ग माणसां तै कहवै, ‘मन्नै अपणी छोरी इस आदमी नै ब्याह दी, अर वो उस ताहीं अप्रिय लाग्गै सै; 17 अर वो तो न्यू कहकै उसपै कुकर्म का दोष लगावै सै, के मन्नै तेरी छोरी म्ह कुँवारीपण के लक्खण कोनी पाए। पर मेरी बेट्टी कै कुँवारीपण के निशान ये सै।’ फेर उसके माँ-बाप नगर के बुजुर्ग माणसां कै स्याम्ही उस चाद्दर ताहीं फैलावै।