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उत्पत्ति 1

26 परमसवर कहा, "हम णस1:26 मनुष्य : मनुष्य नई प्रजाति सै, वो खास तौर पै इस धरती के और तरियां के प्राणियाँ तै न्यारा सै। अपणवरि1:26 अपणे स्वरूप के मुताबिक : यानी अपणी समानता म्ह। मनुष्य का सुर्ग तै सम्बन्ध सै अर इस धरती का कोए भी प्राणी न्ही सै अपणसमनतबणां; अर समदर मछलिाँ, अर अकिाँ, अर घरपशं, अर धरतै, अर ेंगण आळजनधरतेंैं, हक ै।" 27 परमसवर अपणवरणस ीं रचा, अपणवरपरमसवर णस ीं बणा; नर अर उसनणस ि करी। 28 अर परमसवर उन ीं आशिा; अर उनतकहा, "्‍ो-फळो, अर धरतभर , अर उस ीं अपणबस कर ो; अर समदर मछलिाँ, अर अकिाँ, अर धरतेंगण आळजनहक ो।"

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