27 उननै मूसा तै न्यू कहकै बखान करया, "जिस देश म्ह तन्नै म्हारै ताहीं भेज्या था उस म्ह हम गए; उस म्ह साच्चए दूध13:27 दूध समृद्ध अर उपजाऊ धरती अर शहद की धारा बहवै सैं, अर उसकी पैदावार म्ह तै योए सै। 28 पर उस देश के बासिन्दे ताकतवर सैं, अर उसकै नगर गढ़आळे सैं अर घणे बड्डे सैं; अर फेर हमनै ओड़ै अनाकवंशियाँ ताहीं भी देख्या।
30 पर कालेब नै मूसा कै स्याम्ही प्रजा कै माणसां ताहीं चुप करवाण के विचार तै कह्या, "हम इब्बे चढ़कै उस देश नै अपणा कर ल्यां; क्यूँके पक्का म्हारै म्ह इसा करण की ताकत सै।" 31 पर जो माणस उसकै गैल गये थे उननै कह्या, "उन माणसां पै चढ़ाई करण की शक्ति म्हारे म्ह न्ही सै; क्यूँके वे म्हारे तै ताकतवर सैं।" 32 अर उननै इस्राएलियाँ कै स्याम्ही उस देश की जिसका भेद उननै लिया था न्यू कहकै बुराई भी करी, "वो देश जिसका भेद लेण नै हम गये थे इसा सै, जो अपणे बासिन्दया नै निगळ जावै सै; अर जितने आदमी हमनै उस म्ह देक्खे सै वे सारे के सारे बड़ी कद-काट्ठी कै सैं। 33 फेर हमनै ओड़ै नपील्याँ ताहीं, यानिके नपीली जात आळे अनाकवंशियाँ ताहीं देख्या; अर हम अपणी निगांह म्ह तो उनके स्याम्ही टिड्डे कै जिसे दिखाई पड़ा थे, अर इसेए उनकी निगांह म्ह लाग्गा थे।"