12 "इस्राएलियाँ तै कह, के जै किसे माणस की जनान्नी व्यभिचार करकै उसतै बिश्वासघात करै, 13 अर कोए आदमी उसकै गेल्या व्यभिचार करै, पर या बात उसकै पति तै लुक्ही हो अर खुली ना हो, अर वो अशुद्ध होगी, पर ना तो उसकै खिलाफ कोए गवाही हो, अर ना कुकर्म करदी रंगे हाथ पकड़ी गई हो; 14 अर उसके पति कै मन म्ह शक पैदा हो, यानिके वो अपणी घरआळी तै जळण राक्खण लाग्गै अर वो अशुद्ध होई हो; या उसकै मन म्ह जळण पैदा हो, यानिके वो अपणी घरआळी तै जळण राक्खण लाग्गै पर वो अशुद्ध ना होई हो; 15 तो वो आदमी अपणी घरआळी नै याजक कै धोरै ले जावै, अर उसकै खात्तर एपा का दसमां हिस्सा जौ का मैद्दा चढ़ावा करकै ले आवै; पर उसपै तेल न्ही गेरै, ना लोबान धरै, क्यूँके वो जळण आळा अर याद दिलाण आळा, यानिके अधर्म का याद कराण आळा अन्नबलि होवैगा।"
29 "जळण के नियम-कायदे यों ए सै, चाहे कोए जनान्नी अपणे पति नै छोड़ दुसरे की ओड़ फिरकै अशुद्ध हो, 30 चाहे आदमी के मन म्ह शक पैदा हो अर वो अपणी घरआळी पै शक करण लाग्गै; तो वो उस ताहीं यहोवा कै स्याम्ही खड़या करदे, अर याजक उसपै यो सारे नियम-कायदे पूरे करै। 31 फेर आदमी अधर्म के काम्मां तै बच्या रहवैगा, अर जनान्नी अपणे अधर्म का बोझ खुद ठावैगी।"