2 "इस्राएलियाँ तै कह के जिब कोए आदमी या जनान्नी नाज़ीर6:2 नाज़ीर समर्पित या अलग करी होई, यानिके वो दाखमधु अर मदिरा तै न्यारा रहवै; वो ना दाखमधु का, अर ना मदिरा का सिरका पीवै, अर ना दाख का कुछ भी रस पीवै, बल्के दाख ना खावै, चाहे हरी हो चाहे सूक्खी। की मन्नत, यानिके अपणे-आपनै यहोवा कै खात्तर न्यारा करण की खास मन्नत मान्नै, 3 फेर वो दाखमधु अर मदिरा तै न्यारा रहवै; वो ना दाखमधु का, अर ना मदिरा का सिरका पीवै, अर ना दाख का कुछ भी रस पीवै, बल्के दाख ना खावै, चाहे हरी हो चाहे सूक्खी।
5 "फेर जितने दिन उसनै न्यारा रहण की मन्नत मान्नी हो उतने दिन ताहीं वो अपणे सिर पै छुरा ना फिरावै; अर जिब तक वे दिन पूरे ना हों जिन म्ह वो यहोवा कै खात्तर न्यारा रहवै जद ताहीं वो पवित्र ठहरैगा, अर अपणे सिर कै बाळां ताहीं बधावै। 6 जितने दिन वो यहोवा कै खात्तर न्यारा रहवै उतने दिन ताहीं किसे लाश कै धोरै ना जावै।