32 हुंह निं कोही मरना लै राज्ज़ी हंदअ। तम्हैं छ़ाडा पाप करनअ, संघा रहा ज़िऊंदै। अह गल्ल डाही मंऐं मालक बिधाता बोली।’"
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32 हुंह निं कोही मरना लै राज्ज़ी हंदअ। तम्हैं छ़ाडा पाप करनअ, संघा रहा ज़िऊंदै। अह गल्ल डाही मंऐं मालक बिधाता बोली।’"