1 बिधाता निं नूहा अर तिन्नां सोभी ज़ीबा बिस्सरुअ, ज़ुंण तेऊ संघै ज़हाज़ा भितरी थिऐ। बिधाता दैनी तेखअ बागरी हणैं, तेखअ लागअ धरती दी पाणीं घटदअ।
2 बिधाता किई सारी धरतीए तिंयां सोबल़ा बंद ज़िधा का पाणीं त लागअ द बागै निखल़दअ, अर सरग बी कुआशुअ।
3 एकी शौआ पज़ाह धैल़ी बाद लागअ पाणीं धरती दी कबल्लअ घटदअ।
4 तैहा साले कातीए भिन्नैं सातुई धैल़ी टेक्कअ ज़हाज़ अरारात धारा प्रैंदै। 5 पाणीं रहअ उंधै घटदअ लागी अर दसुऐ भिन्नें पैहली धैल़ी शुझुई उछ़टी धारे च़ुंडी।
6,7 च़ाल़्ही धैल़ै बाद खोल्हअ नूहै ज़हाज़ो तीरू संघा छ़ाडअ एक काअ बागा लै, पर सह रहअ डैऊंदअ लागी ज़ेभै तैणीं धरती दी पाणीं शुक्कअ निं।
8 तेखअ छ़ाडी नूहै एक पालल़ी ताकि थोघ लागे कि धरती दी पाणीं शुक्कअ कि नांईं।
9 पाणीं थिअ अज़ी बी सारै दी, ज़ांऊं तैहा पालल़ी बेशणा लै किधी ज़ैगा निं भेटी, सह पुजी ज़हाज़ा दी बापस फिरी, नूहै किअ आपणअ हाथ तीरू बागै संघा ढाकी पालल़ी ज़हाज़ा भितरा लै।
10 साता धैल़ै बाद छ़ाडी नूहै पालल़ी भिई बागा लै।
11 सान्हां पुजी पालल़ी बापस ज़हाज़ा दी फिरी, च़ुंज़ी आणअ जैतूने बूटा का हरअ पाच। तेखअ हेरअ नूहै ज़ाणीं कि धरती दी गअ पाणीं घटी।
12 तेखअ न्हैल़ै तेऊ सात धैल़ै होर बितदै, संघा छ़ाडी सह पालल़ी अर ऐहा बारी निं सह बापस फिरी। 13 नूहे अमर गई ती ऐबै छ़ह शौ एकी साले हई। तैहा साले पैहली धैल़ी मुक्कअ धरती दी पाणीं घटी। नूहै भाल़अ ज़हाज़ो धुंघर घुआल़ी करै कि धरती लागी ऐबै शुक्कदी।
14 तैहा साले दुजै भिन्नें स्ताहुई धैल़ी हुई तेखअ धरती पठी शुक्की।
15 तेखअ बोलअ बिधाता नूहा लै, 16 "ऐबै निखल़ तूह आपणीं लाल़ी अर नुशा-शोहरू संघी ज़हाज़ा का बागा लै।
17 "इना च़ेल्लू-पखीरू अर सोभी धरतीए सोभी ज़ीबा बी काढ ज़हाज़ा का बागै ताकि ईंयां आप्पू मांझ़ै आपणीं-आपणीं ज़ातीए साबै फल़े-फूले अर सारी धरती दी भर्हिए।"
18 तेखअ निखल़ै नूह अर तेऊए लाल़ी आपणैं नुशा-शोहरू संघी ज़हाज़ा का बागै।
19 सोभै हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीब अर च़ेल्लू-पखीरू बी डेऊऐ ज़हाज़ा का निखल़ी धरती दी आपणीं-आपणीं ज़ातीए साबै।
20 नूहै बणाईं एक बेदी कि सह तिधी बिधाता लै बल़ीदान करी सके। तेखअ किऐ तेऊ छ़ांटी करै तिंयां पशू अर च़ेल्लू-पखीरू हूम बल़ी ज़ुंण बल़ीदान करना लै शुचै आसा।
21 ज़ांऊं हूम बल़ीए बधिया बास्स उझ़ुई, तेखअ सोठअ बिधाता इहअ, "ऐबै निं मुंह मणछे इना पापी कामां करनै पिछ़ू धरती लै सज़ा दैणीं। सोभी मणछे आसा सोठ ई बूरी, पर ज़िहअ करै मंऐं ज़िऊंदै ज़ीब एभै खतम किऐ तिहअ निं मुंह ऐबै भिई करनअ।
22 ज़ेभै तैणीं अह धरती रहे,
तेभै तैणीं रहणीं एथ
बऊंणीं-लऊंणीं,
रीत-बसंत,
हिंऊंद भराल़ हंदै लागी।"