1 बिधाता बोलअ नूहा लै, "आपणैं सोभी टबरा संघी डेऊ ज़हाज़ा भितरा लै, किल्हैकि मुखा शुझुअ सारै संसारै तूह एक्कै मणछ धर्मीं।
2 "सोभी ज़ातीए शुचै पशू ज़ुंण बल़ीदाना लै शुचै आसा, तिन्नां मांझ़ै निंयैं तूह सात-सात ज़ोल़ी नर-मादा ज़हाज़ा, पर ज़ुंण पशू शुचै नांईं आथी तिन्नां मांझ़ै निंयैं एक-एक ज़ोल़ी नर-मादे साबै।
3 "सरगै डैऊणै आल़ै च़ेल्लू-पखीरू मांझ़ै बी निंयैं सात-सात ज़ोल़ै नर-मादा, ताकि तिंयां बी आजू धरती दी रहे।
4 "किल्हैकि आझ़ा का साता धैल़ी बाद बरशाऊंणअ मुंह ऐबै ऐहा धरती प्रैंदै च़ाल़्ही धैल़ै अर च़ाल़्ही राची कबल्लअ पाणीं, अर ज़ेतरै बी ज़ीब मंऐं बणाऐं दै आसा, तिंयां करनै मुंह सोभै मारी खतम।"
5-7 ज़धू पाणींए प्रल़या का बच़णा लै नूह ज़हाज़ा भितरा लै डेऊअ, तधू थिई तेऊए अमर छ़ह शौआ साले। ज़िहअ बिधाता तेऊ लै बोलअ त, तेऊ किअ तिहअ ई। तेऊ निंयैं आपणीं लाल़ी, शोहरू अर नुशा बी आप्पू संघै ज़हाज़ा भितरा लै।
8,9 तेखअ ज़िहअ बिधाता बोलअ त, तेते ई साबै निंयैं नूहै शुचै अर छ़ोतलै सोभै पशू, धरतीए होर ज़ीब अर च़ेल्लू-पखीरू नर-मादे साबै आप्पू संघै ज़हाज़ा दी।
10 साता धैल़ै बाद लागअ ज़ल-प्रल़यो पाणीं धरती प्रैंदै बर्शदअ।
11,12 नूह थिअ तधू छ़ह शौआ सालो ज़धू सारी धरती दी हर ज़ैगा का लागी सोबल़ा फुटदी। सरग लागअ हंदअ इहअ ज़िहअ तीरू घुआल़अ, अर च़ाल़्ही धैल़ी अर राची तैणीं रहअ सरग हंदअ लागी। ईंयां सोभै गल्ला लागी तैहा साले दुजै भिन्नें सातुई धैल़ी बाद हंदी।
13 तैहा ई धैल़ी डेऊऐ नूह तेऊए लाल़ी, आपणैं चिई शोहरू शेम, हाम, ज़बेद अर तिन्नां चिई नुशा संघी ज़हाज़ा भितरी। 14 तिन्नैं निंयैं आप्पू संघै हरेकी ज़ातीए घरेलू पशू, धरतीए होर हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीब अर च़ेल्लू-पखीरू ज़हाज़ा दी।
15 ज़ेतरै बी ज़िऊंदै ज़ीब थिऐ, तिंयां निंयैं नूहै नर-मादे साबै आप्पू संघै ज़हाज़ा दी।
16 ज़िहअ बिधाता बोलअ त, ज़ांऊं तेऊ साबै सोभ ज़हाज़ा भितरी पुजै, तेखअ बुदरअ बिधाता ज़हाज़ो दुआर।
17,18 च़ाल़्ही धैल़ै रहअ धरती दी सरग कबल्लअ धैल़ी-राची हंदअ लागी। सारी धरती रही पाणीं करै भर्हदी लागी, ज़हाज़ रहअ उझै-उझै उझ़दअ लागी, खिरी लागअ ज़हाज़ धरती का पाणीं प्रैंदै तरदअ।
19,20 खिरी भर्हुअ धरती दी एतरअ पाणीं कि, ज़ेतरी बी उछ़टी-उछ़टी धारा आसा, तिंयां डुबी सोभै अर पाणीं भर्हुअ तेता का पंद्रा हाथ उझै तैणीं।
21 धरती दी ज़ेतरै बी ज़ीब, च़ेल्लू-पखीरू अर मणछ थिऐ, तिंयां मूंऐं सोभै।
22,23 धरती दी ज़ेतरै बी ज़ीब ज़िऊंदै थिऐ, तिंयां हुऐ सोभ मरी खतम! बच़ै सिधै तिंयां हांढणै-फिरनैं आल़ै ज़ीब, च़ेल्लू-पखीरू अर मणछ ज़ुंण नूहा संघै ज़हाज़ा भितरी थिऐ बेठै दै।
24 एकी शौआ पज़ाह धैल़ी तैणीं रही सारी धरती पाणीं करै भर्हुई।