1 तेखअ बोलअ बिधाता मोसा लै भिई, 2,3 "ज़ेभै कुंण मणछ कोहल़े बमारी का राम्बल़अ जाए हई, सह शादै तेते ज़ाच़-भाल़ करना लै प्रोहता बसती का बागै, ज़ै प्रोहता का शुझिए कि सह कोहल़ गअ तेऊ मणछा का डेऊई, 4 तै णाऊंऐं प्रोहत कहा का दूई ज़िऊंदै च़ेल्लू ज़ुंण बल़ीदान करना लै शुचै आसा, तेता संघै बझ़ैल़ै केल़ुईए शोली, मौल़ी अर ज़ुफे डाल़ी आणनैं।
5 "तेखअ करै प्रोहत तेऊ च़ेल्लू बहूंदै पाणीं दी माट्टे पारू प्रैंदै बल़ीदान। 6 तेखअ डबेऊऐ तेऊ दुजै ज़िऊंदै च़ेल्लू, केल़ुईए शोली, मौल़ी अर ज़ुफे डाल़ी तेऊ च़ेल्लूए लोहू जैंदरी ज़ुंण बहूंदै पाणीं दी बल़ीदान किअ। 7 एता बाद, छ़ल़िकै तेऊ लोहू साता बारी तेऊ मणछा लै ज़ुंण कोहल़े बमारी का राम्बल़अ हुअ, खाखा का बोलै प्रोहत इहअ, ‘ऐबै आसा तूह शुचअ।’ खिरी छ़ाडै तेऊ ज़िऊंदै च़ेल्लू पोर्ही।
8 "एता बाद धोऐ सह मणछ आपणैं झिकल़ै-टाल्है ज़ुंण कोहल़े बमारी का राम्बल़अ हुअ। आपणैं मुंडा संघी सारी घेरीए शराल़ बी छाम्बै सह पठी। संघा न्हैईऐ-धोईऐ, इहअ करै हणअ सह मणछ पठी शुचअ। तेखअ सका सह मणछ बसती दी एछी पर साता धैल़ी तैणीं निं सह आपणैं डेरै का बागै निखल़ी। 9 तेखअ छाम्बै सह सातुऐ धैल़ै एकी बारी भिई आपणैं मुंडे, भृहुंई, दाल़्ही अर सारी घेरीए शराल़ पठी। खिरी धोऐ आपणैं झिकल़ै, संघा न्हैईऐ-धोईऐ, तेखअ हणअ सह मणछ पठी शुचअ।
10 "आठुऐ धैल़ै निंयैं सह मणछ प्रोहता सेटा लै दूई मिम्मूं अर एक गाभी ज़ेथ किछ़ै खोट निं होए, तेता संघै निंयैं सह एक सेर जैतूनो तेल अर दूई होछ़ै पाथै सोभी का बधिया कणको पिठअ तेथ तेल पाई।
11 "तेखअ ज़ुंण प्रोहत तेऊ मणछा शुचै करनै आल़अ होए, तेऊ करनअ सह मणछ अर तेऊए भैंट मेल़-ज़ोल़े खिम्भे प्रऊल़ी आजू बिधाता सम्हनै खल़ै। 12 तेखअ काटै प्रोहत एक मिम्मूं एक सेर तेल आणै दोश बल़ी लै। तेखअ रगाओऐ प्रोहत मुंह बिधाता सम्हनै तेता का रगाऊंणे भैंट कि सह आसा मुल्है। 13 अह बल़ीदान आसा खास्सअ पबित्र अर अह आसा प्रोहतो भाग, अह लोल़ी तिधी काटअ ज़िधी पाप बल़ी अर मुंह बिधाता खुश करना लै हूम बल़ीदान करा।
14 "दोश बल़ीए तेऊ मिम्मूंओ धख लोहू लेस्सै प्रोहत तेऊ मणछे दैहणै कानै, दैहणै हाथे गुंठै अर दैहणै खूरे गुंठै दी, ज़ुंण मणछ कोहल़ा का शुचअ करनअ। 15 तेखअ तरैल़ै प्रोहत तेऊ एक सेर तेला का धख तेल आपणैं खिंज़ै हाथे नथअई दी, 16 तेखअ छ़ल़िकै प्रोहत तेता दी आपणीं गुंठी डबेऊई करै दैहणै हाथा करै बिधाता लै, मेल़-ज़ोल़े खिम्भा बाखा साता बारी। 17 तेता का ज़ुंण तेल प्रोहते नथअई दी रहे, तेता का लेस्सै धख-धख तेल तेऊ मणछे दैहणै कानै, दैहणै हाथे गुंठै अर दैहणै खूरे गुंठै दी दोश बल़ीए तेऊ मिम्मूंए लोहू ई प्रैंदै, 18-20 बाकी ज़ुंण तेल प्रोहते नथअई दी रहे, तेता तरैल़ै तेऊए मुंडै ज़ुंण मणछ कोहल़े छ़ोता का शुचअ करनअ। तेखअ करै प्रोहत पाप बल़ीदानो गाभू काटी तेऊए पापा लै प्राश्त, संघा करै मुंह बिधाता खुश करना लै हूम बल़ी। इना संघै करै बेदी दी नाज़ बल़ी करै बी हूम। एता बाद हणअ सह मणछ पठी शुचअ।
21 "पर ज़ै सह कोहल़े बमारी का शुचअ हणैं आल़अ गरीब होए अर तेऊ का ईंयां एतरी च़िज़ा नांईं पुगे, तै आणै सह दोश बल़ी लै एक मिम्मूं, तेता संघै आणै एक सेर तेल, एक बडअ आधअ पाथअ तेल राल़अ द कणको पिठअ नाज़ बल़ी लै। प्रोहत रगाओऐ तेता मुंह सम्हनै उझै च़की कि अह आसा मुंह बिधाता लै। 22 ज़िहअ बी तेऊ मणछा का पुगे, सह आणै दूई कबूतर, कि आणै दूई पालल़ी, एक हणअ तेता का पाप बल़ी अर दुजअ हणअ मुंह बिधाता खुश करना लै हूम बल़ी करना लै। 23 प्रोहत करै इना आठुऐ धैल़ै मेल़-ज़ोल़े खिम्भे प्रऊल़ी आजू मुंह बिधाता लै भैंट।
24,25 "प्रोहत काटै तेऊ मिम्मूं दोश बल़ी लै, संघा रगाओऐ तेता उझै च़की कि अह आसा मुंह बिधाता लै। तेखअ लेस्सै तेतो धख-धख लोहू तेऊ मणछे दैहणै कानै, दैहणै हाथे अर खूरे गुंठै दी ज़ुंण कोहल़ा का शुचअ करनअ।
26 "तेखअ तरैल़ै प्रोहत तेऊ जैतूने तेला मांझ़ै धख तेल आपणैं खिंज़ै हाथे नथअई दी, 27 तेखअ छ़ल़िकै प्रोहत तेता दी आपणीं गुंठी डबेऊई करै दैहणै हाथै मुंह बिधाता लै मेल़-ज़ोल़े खिम्भा बाखा साता बारी। 28 तेता का ज़ुंण तेल तेऊए नथअई दी रहे, तेता का लेस्सै धख-धख तेल तेऊ मणछे दैहणै कानै, दैहणै हाथे गुंठै अर दैहणै खूरे गुंठै दी ज़ुंण कोहल़े बमारी का शुचअ करनअ। ज़िहअ दोश बल़ीओ लोहू तेऊए कानै लेस्सअ, तेल बी लेस्सै तिहअ ई तेता प्रैंदै।
29-31 "बाकी तेल ज़ुंण प्रोहते नथअई दी रहे, तेता तरैल़ै तेऊ मणछे मुंडै ज़ुंण कोहल़ा का शुचअ करनअ।
"तेखअ कबूतर या पालल़ी मांझ़ै ज़िहअ बी तेऊ मणछा का पुगे, प्रोहत करै तेता मांझ़ै एक पापो प्राश्त करना लै नाज़ बल़ी संघी पाप बल़ी अर दुजअ करै मुंह बिधाता खुश करना लै हूम बल़ी। एता बाद हणअ सह मणछ पठी शुचअ।
32 "ज़ै कहा कोहल़ होए निखल़अ द अर तेऊ का शुचै हणें सोभै च़िज़ा नांईं बी पुगे, ईंयां एतरी च़िज़ा लागणीं ज़रूर करनी ई।"
33 बिधाता बोलअ मोसा अर हारणा लै भिई इहअ कि लोगा का खोज़ा इहअ, 34 "ज़ेभै हुंह तम्हां कनान देशै पजैल़ी तैहा ज़ैगे तम्हां सदा लै मालक बणाऊं, तेभै ज़ै हुंह तम्हां मांझ़ै कसरै घअरै भित्ती दी भुफी रहैऊं, 35 सोभी का आजी खोज़ै तेता प्रोहता का इहअ, ‘मेरै घअरे भित्ती आसा भुफी लागी दी।’
36 "प्रोहत करै तेखअ इहअ हुकम, ‘एते ज़ाच़-भाल़ करना लै मेरै एछणैं का आजी करा सारअ घअर रित्तअ, तेऊ घअरै हुई सोभै गल्ला छ़ोतली।’
37 "तेखअ करै प्रोहत तिधी डेऊई तेते ज़ाच़-भाल़, ज़ै प्रोहता का शुझिए कि भित्ती दी आसा लाल अर हरै रांगा ज़िहै दाग अर तेते रेखा बी आसा भित्ती दी डुघी गई दी पल़ी, 38 तै डाहै प्रोहत साता धैल़ी तैणीं तेऊ घअरो दुआर हूल़ी। 39 सातुऐ धैल़ै करै प्रोहत तिधी एछी भिई ज़ाच़-भाल़ कि सह भुफी खास्सी बढी कि तेतरी ई आसा।
40,41 "ज़ै सह तेतरी ई होए, तै बझ़ैल़ै प्रोहत भित्तीए तैहा भुफी लागी दी ज़ैगे तेऊ माट्टै कतोच़ी करै पोर्ही काढणैं, तिन्नां भुफी लागै दै पात्थरा बी बझ़ैल़ै पोर्ही काढणैं, तेखअ बझ़ैल़ै तेऊ माट्टै अर पात्थरा नगरी बागै कहा छ़ोतली ज़ैगा शोटणै।
42 "तेखअ च़िणैं तैहा भित्ती भिई नऊंऐं पात्थरा करै संघा लेस्सै तैहा भित्ती होर गार बणाईं।
43 "लेस्सी-टुशी करै बी ज़ै सह भुफी भिई निखल़े, 44 तेते ज़ाच़-भाल़ करी बोलै प्रोहत इहअ, ‘अह घअर हुअ छ़ोतलअ, एथ लागी सारै घअरै भुफी, अह गाल़णै आल़ी कोहल़ निं ऐबै डेऊंदी।’
45 "तेखअ ढोल़ै तेऊ सारै घअरा पोर्ही, संघा शोटै तेते काठ, पात्थर अर सारै मलुऐ नगरी बागै कहा छ़ोतली ज़ैगा।
46 "ज़हा घअरो दुआर भुफी लागणै पिछ़ू हूल़ी होए डाहअ द, ज़ै कुंण तेऊ घअरा भितरी डेओए, सह मणछ रहणअ उडै तैणीं छ़ोतलअ। 47 ज़ै कुंण तेऊ घअरा भितरी खाए या सुत्ते, सह धोऐ तेखअ आपणैं झिकल़ै-टाल्है पठी।
48 "तेखअ ज़ै प्रोहता का शुझिए कि ज़धा ओर्ही अह घअर भिई लेस्सअ-टुशअ, तधा ओर्ही निं भिई तेथ भुफी लागी, तै बोलै प्रोहत, ‘अह घअर आसा ऐबै शुचअ, भुफी गई खतम हई।’ 49 तेतो लोल़ी सोभी का थोघ लागअ कि अह घअर आसा ऐबै शुचअ, तेता लै आणै सह घअरो मालक, दूई च़ेल्लू, केल़ुईए शोली, लाल सूत अर ज़ुफे डाल़ी तेऊ घअरै।
50 "एक च़ेल्लू करै बहूंदै पाणीं दी माट्टे पारू प्रैंदै बल़ीदान, 51,52 एतो लोहू दैऐ कहा भांडै दी निटरनै। तेखअ डबेऊऐ तेथ तिन्नां केल़ुईए शोली, लाल सूत, ज़ुफे डाल़ी अर तेऊ दुजै च़ेल्लू तेऊ लोहू अर पाणीं जैंदरी। तेखअ छ़ल़िकै सह तेऊ लोहू अर पाणीं तेऊ घअरा बाखा साता बारी, तेखअ हणअ सह घअर पठी शुचअ।
53 "खिरी, छ़ाडै तेऊ दुजै च़ेल्लू पोर्ही ज़ुंण ज़िऊंदअ आसा, इहअ करै हणअ तेऊ घअरा लै प्राश्त अर शुचै करनैओ बधान पूरअ।
54-57 "ईंयां गल्ला लागणीं तम्हां ज़रूर करनी ज़ै तम्हां घेरी दी किज़ै दुखणअ, फिमशी, शुआंण, शिंची, दाग अर घअरा या झिकल़ै दी लाला-हरी रांगे भुफीओ कोहल़ शुझिए, इना सोभी कोहल़े छ़ोता का शुचै हणैंओ बधान आसा अह ई।"