गरीबे मज़त
35 "ज़ै थारअ कुंण भाई-बंध पठी दाल़जी होए कि तेऊए निं बैल़ी खाई क्लारी आथी, तिन्नां इहै मणछे करै इहअ समझ़ी मज़त कि तूह आसा कहा परदेसीए मज़त करदअ ज़ुंण तम्हां जैंदरी रहा।25:35 बधा. 15:7,8 36,37 तेऊ का नां ढब्बै ऋण दैई बैज़ लई अर नां तेऊ का ज़िणस बेच़ी नफअ खटी। पर तम्हैं करै तिहअ, ज़िहअ हुंह थारअ बिधाता तम्हां लै बोला अर तेऊ आपणैं भाई-बंधा दैऐ आप्पू संघै ज़िन्दगी ज़िऊंणै।25:36-37 लुआ. 22:25; बधा. 23:19,20; लूक. 6:35